
तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में शुक्रवार रात हुई भीषण मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। भारी बारिश के चलते जिले के पुलियामपट्टी में स्थित श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी शिविर पूरी तरह जलमग्न हो गया। शिविर में पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि देखते ही देखते 100 से अधिक घरों के भीतर कई फीट तक पानी भर गया। अचानक हुए इस जलभराव के कारण शिविर में रह रहे शरणार्थी परिवारों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और लोगों को आनन-फानन में अपने छोटे बच्चों व जरूरी घरेलू सामान को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर शरण लेनी पड़ी।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र के आसपास स्थित प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बंद होने और समीपवर्ती जलाशयों के ओवरफ्लो होने से हालात बेकाबू हो गए। स्थिति तब और अधिक खतरनाक हो गई जब रिहायशी इलाके के एकदम करीब स्थित 40 फीट गहरा एक खुला कुआं बारिश के पानी से लबालब भर गया, जिससे अंधेरे में किसी अनहोनी का गंभीर खतरा मंडराने लगा। ग्रामीणों ने जमा पानी निकालने के लिए दीवारों और अवरोधों को तोड़कर अस्थायी नालियां बनाने का प्रयास किया, लेकिन मलबे और चोक पड़े नालों की वजह से पानी की निकासी नहीं हो सकी।
घटना की सूचना मिलते ही शनिवार सुबह डिंडीगुल जिला कलेक्टर एस. दुर्गा मूर्ति प्रशासनिक अमले के साथ पुलियामपट्टी शरणार्थी शिविर पहुंचे और जमीनी हालात का सघन मुआयना किया। कलेक्टर ने जलभराव से प्रभावित शरणार्थी परिवारों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और जलस्तर की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने मौके पर मौजूद राजस्व और नगर निकाय के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से भारी पंप लगाकर बस्तियों से पानी निकालने और भोजन-पानी जैसी बुनियादी राहत सामग्री वितरित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने प्रभावित निवासियों को आश्वस्त किया कि शिविर में राहत कार्य युद्धस्तर पर पूरे किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस निचले इलाके में हर मानसूनी बारिश के दौरान बार-बार बनने वाली जलभराव की समस्या को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से एक व्यापक तकनीकी योजना तैयार कर स्थायी जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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