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तमिलनाडु के बिजली क्षेत्र पर 2.47 लाख करोड़ रुपए का कर्ज, दरों में बढ़ोतरी नहीं : मंत्री


चेन्नई, 25 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु के बिजली मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने गुरुवार को तमिलनाडु बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति से जुड़ा श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें बताया गया कि राज्य के बिजली क्षेत्र पर 2.47 लाख करोड़ रुपए का बकाया कर्ज है।

चेन्नई, 25 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु के बिजली मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने गुरुवार को तमिलनाडु बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति से जुड़ा श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें बताया गया कि राज्य के बिजली क्षेत्र पर 2.47 लाख करोड़ रुपए का बकाया कर्ज है।

बढ़ते वित्तीय बोझ के बावजूद मंत्री ने उपभोक्ताओं को आश्वासन दिया कि इस वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

यह श्वेत पत्र चेन्नई स्थित तमिलनाडु बिजली बोर्ड मुख्यालय में जारी किया गया, जिसमें पिछले 25 वर्षों के बिजली क्षेत्र के वित्तीय प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की गई है।

यह उस समय आया है जब तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में राज्य के वित्त पर एक व्यापक श्वेत पत्र जारी किया था, जिसमें राज्य का कुल कर्ज 13.18 लाख करोड़ रुपए और बिजली क्षेत्र की देनदारी 2,47,130 करोड़ रुपए आंकी गई थी।

मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 2021 से 2026 के बीच बिजली बोर्ड का कुल खर्च 5.32 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि इसी अवधि में उसकी आय 4.97 लाख करोड़ रुपए रही। इस कारण 34,447 करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

मंत्री ने बताया कि बिजली क्षेत्र अब राज्य के सभी सार्वजनिक उपक्रमों के कुल कर्ज का 77.6 प्रतिशत हिस्सा है, जो वित्तीय सुधारों की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

श्वेत पत्र के अनुसार, बिजली बोर्ड कई सरकारों के कार्यकाल में लगातार घाटे में रहा है। 2006-11 के दौरान 35,463 करोड़ रुपए का घाटा हुआ, जो 2011-16 में बढ़कर 56,361 करोड़ रुपए और 2016-21 में 58,534 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि भारी खर्च और उधारी के बावजूद बिजली ढांचे का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। सरकार वित्तीय प्रबंधन और कार्यकुशलता सुधारकर बिजली क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने बताया कि तमिलनाडु की अधिकतम बिजली मांग 21,307 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। राज्य अपनी बिजली जरूरतें हाइड्रो, थर्मल और गैस आधारित उत्पादन के साथ-साथ केंद्रीय संयंत्रों, निजी उत्पादकों और अन्य राज्यों से खरीद कर पूरी करता है। सरकार महंगे अल्पकालिक बिजली खरीद समझौतों की जगह दीर्घकालिक अनुबंधों पर काम कर रही है, जिससे हर महीने लगभग 215 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है।

मंत्री ने दोहराया कि इस वर्ष बिजली दरों में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। सरकार का तात्कालिक फोकस बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति सुधारने पर है। नौ स्थानों पर बिजली कंडक्टरों की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच की जाएगी।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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