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तेलंगाना: साइबराबाद पुलिस ने जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया, तीन गिरफ्तार


हैदराबाद, 29 मई (आईएएनएस)। साइबराबाद पुलिस ने फर्जी सरकारी आदेशों से जुड़े एक बड़े जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

हैदराबाद, 29 मई (आईएएनएस)। साइबराबाद पुलिस ने फर्जी सरकारी आदेशों से जुड़े एक बड़े जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने गंडीपेट में लगभग 1,500 करोड़ रुपए की 10 एकड़ सरकारी जमीन को अवैध रूप से बेचने के लिए फर्जी सरकारी आदेश (जीओ) बनाए।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू को इस मामले में आरोपी बनाया गया है और वह कथित तौर पर फरार हैं। निम्माला राजेश गौड़, निम्माला वेणुगोपाल और निम्माला साई किरण को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस उपायुक्त च. श्रीनिवास ने बताया कि पुलिस को 23 मई को रंगारेड्डी जिले के गांडीपेट मंडल के तहसीलदार श्रीनिवास रेड्डी से शिकायत मिली थी, जिसमें कहा गया था कि कुछ फर्जी और मनगढ़ंत सरकारी आदेश (जीओ) बनाए गए और व्हाट्सएप ग्रुपों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से प्रसारित किए गए, जिनमें झूठा दावा किया गया था कि सर्वे नंबर 18 में स्थित सरकारी जमीन को नियमित कर निजी व्यक्तियों के नाम आवंटित कर दिया गया है। जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों में पांच फर्जी सरकारी आदेश (जीओ) की प्रतियां शामिल थीं।

शिकायत के आधार पर साइबरबाद के नरसिंगी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।

जांच के दौरान, आरोपी निम्माला वेणुगोपाल, निम्माला रामास्वामी और निम्माला राजेश के घरों पर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बैंक पासबुक, समझौता ज्ञापन (एमओयू) दस्तावेज, मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए गए।

जांच में पता चला कि गंडीपेट गांव निवासी स्वर्गीय दशरथ के पुत्र और पुत्री, निम्माला राजेश गौड़, निम्माला वेणुगोपाल, निम्माला रामास्वामी और मंगा ने सर्वे संख्या 18 में स्थित लगभग 10 एकड़ सरकारी पोराम्बोक भूमि पर कथित तौर पर कब्जा जताया था।

इसके बाद, परिवार के सदस्यों ने उक्त भूमि के संबंध में राहत पाने के लिए राजस्व विभाग के खिलाफ याचिकाएं दायर कर उच्च न्यायालय का रुख किया। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2025 में उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं।

अपने दावों को खारिज किए जाने और उक्त सरकारी भूमि पर कोई वैध स्वामित्व, अधिकार या कानूनी हक न होने के बावजूद, आरोपियों ने कथित तौर पर बोला रमेश और ब्रह्मा नायडू के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और खुद को संपत्ति का पूर्ण मालिक और वैध कानूनी अधिकार रखने वाला बताकर 3.5 करोड़ रुपए प्रति एकड़ की दर से जमीन बेच दी। निम्माला परिवार के सदस्यों और बोला रमेश और ब्रह्मा नायडू के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे सरकार को अनुचित नुकसान हुआ।

जांच में पता चला कि निम्माला परिवार के सदस्यों ने प्रस्तावित भूमि सौदे के संबंध में दूसरे पक्ष से लगभग 4 करोड़ रुपए प्राप्त किए थे। इस साजिश में सुनील, राधाकृष्ण और अन्य लोगों ने कथित तौर पर मध्यस्थता की थी, जो वर्तमान में फरार हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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