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इतिहास रचकर लौटे 'आर्टेमिस II' के जांबाज: 52 साल बाद चांद की दहलीज चूमकर धरती पर सफल लैंडिंग

सैन डिएगो. अंतरिक्ष इतिहास का एक नया अध्याय आज सफलतापूर्वक पूरा हो गया. नासा के आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हेंसन—चंद्रमा का चक्कर लगाकर सुरक्षित धरती पर लौट आए हैं.

भारतीय समयानुसार आज, 11 अप्रैल 2026 की सुबह 5:37 बजे, उनका 'ओरियन कैप्सूल' सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में उतरा. इस 'स्प्लैशडाउन' के साथ ही मानवता ने चंद्रमा पर फिर से कदम रखने की दिशा में अपनी सबसे बड़ी बाधा पार कर ली है.

मिशन की 3 बड़ी उपलब्धियां:
दूरी का नया रिकॉर्ड: 6 अप्रैल को ओरियन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी पर था. यह किसी भी 'मानव-रेटेड' अंतरिक्ष यान द्वारा तय की गई अब तक की सबसे लंबी दूरी है.

चांद का 'डार्क साइड': अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के उस हिस्से (Far Side) की तस्वीरें लीं जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता.

लाइफ सपोर्ट का परीक्षण: 10 दिनों के इस सफर में यान के ऑक्सीजन, तापमान और रेडिएशन सुरक्षा प्रणालियों का कड़ा परीक्षण किया गया, जो भविष्य के आर्टेमिस III (चांद पर लैंडिंग) के लिए महत्वपूर्ण है.

अगला पड़ाव: आर्टेमिस III
इस मिशन की सफलता ने अब आर्टेमिस III का रास्ता साफ कर दिया है, जिसके तहत नासा पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति को चंद्रमा की सतह पर उतारेगा. आर्टेमिस II ने साबित कर दिया है कि हमारा 'ओरियन' यान गहरे अंतरिक्ष में इंसानों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है.

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