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ट्रेनों में एसी फेल होने का झंझट खत्म, भारतीय रेलवे का ₹14.65 करोड़ का प्लान, कोचों का सुधरेगा कूलिंग सिस्टम


भोपाल. ट्रेनों के एसी (AC) कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की ओर से एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। भीषण गर्मी के मौसम में अक्सर सफर के दौरान एसी खराब होने या पर्याप्त कूलिंग न मिलने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए रेलवे ने एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। भोपाल स्थित कोच रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप (CRWS), निशातपुरा में अब बड़े पैमाने पर ट्रेनों के वातानुकूलित सिस्टम के कायाकल्प का काम शुरू होने जा रहा है। इसके लिए रेलवे ने 14.65 करोड़ रुपये का एक मेगा बजट मंजूर किया है।

527 एलएचबी कोचों का बदलेगा सिस्टम

रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष परियोजना के तहत अगले 24 महीनों के भीतर कुल 527 एलएचबी (LHB - Linke Hofmann Busch) आधुनिक एसी कोचों के कूलिंग सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड और रिपेयर किया जाएगा। इन कोचों में लगी कुल 1054 रूफ माउंटेड पैकेज यूनिट (RMPU) और उनके कंट्रोल पैनलों की गहन ओवरहालिंग (Overhauling) की जाएगी।

क्या होती है आरएमपीयू (RMPU) यूनिट?

आरएमपीयू किसी भी आधुनिक एलएचबी ट्रेन कोच का सबसे मुख्य और संवेदनशील हिस्सा होता है। यह यूनिट कोच की छत पर स्थापित होती है और पूरे डिब्बे में समान रूप से ठंडी हवा पहुंचाने का काम करती है। चौबीसों घंटे लगातार चलने के कारण इस यूनिट के कंप्रेसर और अन्य पुर्जों में घिसावट आ जाती है। इस 14.65 करोड़ की योजना के तहत इन यूनिट्स के खराब पुर्जों को बदला जाएगा ताकि बीच सफर में एसी बंद होने की गुंजाइश शून्य हो जाए।

कंट्रोल पैनलों की होगी हाई-टेक जांच

इस मेगा प्लान के तहत सिर्फ एसी वेंट ही नहीं, बल्कि बिजली की आपूर्ति और तापमान को नियंत्रित करने वाले मुख्य कंट्रोल पैनलों की भी गहन वायरस और शॉर्ट-सर्किट जांच होगी। रेलवे का मानना है कि समय रहते तकनीकी खामियों (Technical Glitches) को पकड़ लेने से सफर के दौरान होने वाली आपातकालीन मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी।

राजधानी और शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेनों को सीधा फायदा

चूंकि एलएचबी कोचों का मुख्य रूप से उपयोग देश की प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों जैसे—राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, दुरंतो और वंदे भारत के कोचों में किया जाता है, इसलिए इस कदम से लाखों यात्रियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। समय पर इस मेंटेनेंस के होने से न केवल कोचों की कार्यक्षमता (Efficiency) बढ़ेगी, बल्कि रेलवे के इन महंगे संसाधनों की उम्र भी लंबी होगी। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद यात्रियों को अब ट्रेनों में घर जैसी कूलिंग और बेहद आरामदायक सफर का अहसास मिलेगा।

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