
गौरझामर। सागर-नरसिंहपुर मार्ग एनएच-44 पर चौपड़ा के पास एक घायल बाघ के देखे जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। बाघ की खबर आग की तरह फैली और उसे देखने के लिए हाइवे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए गौरझामर थाना पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। वहीं, इस पूरे मामले में वन विभाग के अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। सूचना मिलने के घंटों बाद वन अमला मौके पर पहुंचा, जिसे लेकर वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाघ घायल है और कुछ कदम चलने के बाद लड़खड़ाकर गिर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राहगीरों ने सुबह करीब 8 बजे ही बाघ होने की सूचना दे दी थी। इसके बावजूद वन विभाग का अमला सुबह 10 बजे मौके पर पहुंचा। लापरवाही का आलम यह रहा कि ढाना वन परिक्षेत्र अधिकारी राघवेंद्र चौहान दोपहर करीब 12 बजे बिना वर्दी के सादे कपड़ों में घटनास्थल पर पहुंचे। पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि जब रेंजर से देरी का कारण पूछा गया, तो उन्होंने आम जनता के सवालों पर खीझ भी उतारी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, चौपड़ा के पास बाघ होने की सूचना एक दिन पहले ही वन विभाग को दे दी गई थी। तब अमला पहुंचा और महज औपचारिकता पूरी करके लौट गया। अगर उसी समय गंभीरता दिखाई गई होती और रात से ही निगरानी की जाती, तो यह स्थिति नहीं बनती। हाइवे के पास घायल बाघ की मौजूदगी से किसानों और राहगीरों की जान को बड़ा खतरा हो सकता था।

शासन बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन मैदानी स्तर पर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही इन मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं। गौरतलब है कि कुछ माह पहले ही ढाना परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हिलगन में भी एक बाघ का शव मिला था। स्थानीय लोगों द्वारा सूचना देने के बावजूद तब भी विभाग की लापरवाही सामने आई थी।
खबर लिखे जाने तक फिलहाल बाघ रानगिर ज्वाप बीट के अंतर्गत मौजूद है। विशेष टीम के नेतृत्व में बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू करने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग के आला अधिकारियों को इस मामले में जांच कर लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
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