
भोपाल के बहुचर्चित त्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रकरण में फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की अंतिम रिपोर्ट आना अभी बाकी है तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विवेचना भी प्रगति पर है। ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।
गिरिबाला सिंह पर अपनी बहू त्विशा शर्मा को आत्महत्या के लिए उकसाने और मुख्य आरोपी अपने बेटे समर्थ सिंह का सहयोग करने के गंभीर आरोप हैं। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने दलील दी कि गिरिबाला सिंह एक अत्यंत प्रभावशाली व्यक्ति और पूर्व न्यायिक अधिकारी हैं। आरोप है कि उन्होंने पूर्व में स्थानीय पुलिस जांच के दौरान समानांतर जांच बैठाकर मामले को प्रभावित करने का प्रयास किया था। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भोपाल की निचली अदालत ने 15 मई को उन्हें अग्रिम जमानत दी थी, जिसे राज्य शासन और मृतका के माता-पिता की अपील पर हाईकोर्ट ने 27 मई को निरस्त कर दिया था।
मामले के अनुसार, त्विशा शर्मा और समर्थ सिंह की पहचान जनवरी 2025 में एक वैवाहिक वेबसाइट (मैट्रिमोनियल साइट) के माध्यम से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और प्रेम संबंध स्थापित हो गए। अक्टूबर 2025 में समर्थ की मां गिरिबाला सिंह ने त्विशा से मुलाकात की और फिर दिल्ली स्थित उनके घर जाकर विवाह तय किया। 9 दिसंबर 2025 को दोनों का विवाह नई दिल्ली में संपन्न हुआ था। विवाह के महज पांच महीने बाद 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में त्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। पति और सास ने दावा किया था कि त्विशा ने फांसी लगाकर खुदकुशी की है।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि अंतरजातीय विवाह होने के कारण शादी के एक महीने बाद से ही त्विशा को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा था। त्विशा अक्सर अपनी भाभी और मायके वालों को फोन कॉल्स व चैट्स के जरिए ससुराल में हो रहे दुर्व्यवहार की जानकारी देती थी। शुरुआत में भोपाल के कटारा हिल्स थाने में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन जांच में लीपापोती के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पूरी विवेचना सीबीआई को सौंपी गई थी।
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