
इस्लामाबाद/दुबई. कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध में 'मध्यस्थ' बनने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को उसके पुराने दोस्त संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने जोर का झटका दिया है. UAE ने पाकिस्तान को 17 अप्रैल तक अपना 2 बिलियन डॉलर (2 अरब डॉलर) का कर्ज ब्याज सहित चुकाने का सख्त अल्टीमेटम दे दिया है.
UAE की नाराजगी और आर्थिक दबाव
पाकिस्तान इन दिनों तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर मध्य पूर्व में सीजफायर कराने की कूटनीतिक चालें चल रहा है. लेकिन, ट्रंप प्रशासन के ईरान पर कड़े एक्शन का समर्थन कर रहे UAE को पाकिस्तान का यह 'शांति राग' रास नहीं आया. UAE का मानना है कि क्षेत्र में शांति के लिए ईरान की आक्रामकता को कुचलना जरूरी है. इसी नाराजगी के चलते UAE ने न केवल अपना पैसा वापस मांगा है, बल्कि कर्ज पर ब्याज दर को भी 3% से बढ़ाकर 6.5% कर दिया है.
ट्रंप की शर्तें और पाकिस्तान का फेलियर
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान दरअसल अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ हुई गुप्त बातचीत के बाद ट्रंप के इशारे पर मध्यस्थता की कोशिश कर रहा था. अमेरिका की शर्त थी कि सीजफायर तभी होगा जब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) को व्यापार के लिए खोल दिया जाए. पाकिस्तान इस एजेंडे को लागू कराने में पूरी तरह विफल रहा है.
मैदान में उतरे 'शांतिदूत' पुतिन
पाकिस्तान के इस हाई-प्रोफाइल मामले में फेल होने के बाद अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कमान संभाल ली है. रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय मोड में है. पुतिन की इस एंट्री ने पाकिस्तान की कूटनीतिक अहमियत को लगभग खत्म कर दिया है, जिससे अब शहबाज शरीफ सरकार के सामने न केवल साख बचाने बल्कि 2 अरब डॉलर का इंतजाम करने की भी बड़ी चुनौती है.
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