
उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से राहत भरी खबर सामने आई है। पनपथा बफर क्षेत्र में एक बुजुर्ग को मौत के घाट उतारने वाले हमलावर बाघ को वन विभाग की टीम ने आखिरकार पकड़ लिया है। इस सफल रेस्क्यू अभियान के बाद करीब 5 वर्षीय नर बाघ को गुरुवार को मगधी परिक्षेत्र स्थित बहेरहा इंक्लोजर में सुरक्षित स्थानांतरित कर दिया गया है। वन विभाग के अनुसार पकड़ा गया बाघ पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन अब उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
4 हाथियों और 50 कर्मियों की मदद से चला अभियान
पनपथा बफर के आरएफ 604 क्षेत्र में यह हमलावर बाघ पिछले काफी समय से घनी झाड़ियों में छिपा हुआ था, जिससे आस-पास के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल था। इस दहशत को खत्म करने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा अभियान चलाया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए विभाग ने अपने चार प्रशिक्षित हाथियों—लक्ष्मण, सूर्या, गणेश और सुंदरगज को मैदान में उतारा। इसके साथ ही वन्यजीव विशेषज्ञों और डॉक्टरों सहित 50 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम इस रेस्क्यू को सफल बनाने में जुटी रही।
वन्यजीव चिकित्सक ने बाघ को किया ट्रैंकुलाइज
झाड़ियों में छिपे बाघ को जब हाथियों की मदद से घेरा गया, तो वह बाहर की तरफ आया। इसी दौरान तैनात वन्यजीव चिकित्सक ने सूझबूझ दिखाते हुए बाघ को ट्रैंकुलाइज (Tranquilize) कर बेहोश कर दिया। बाघ के बेहोश होने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने उसका प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसके बाद पिंजरे की मदद से उसे सुरक्षित तरीके से बहेरहा इंक्लोजर में छोड़ दिया गया।
इस रेस्क्यू को लेकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने मीडिया को बताया कि बाघ के ब्लड सैंपल के साथ-साथ अन्य आवश्यक जांच के लिए उसके अंगों के सैंपल भी लिए गए हैं, जिन्हें लैब भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट और इंक्लोजर में बाघ के व्यवहार को देखने के बाद ही उसके भविष्य को लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वन विभाग की अपील: जंगल में हमेशा समूह में जाएं
टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक ने स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों से जंगल में जाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात साझा करते हुए बताया कि कई बार जंगल में महुआ, सूखी लकड़ी या अन्य वन उपज बीनते समय जब इंसान नीचे झुकता है, तो बाघ उसे कोई चौपाया (चार पैरों वाला जानवर) समझकर हमला कर देता है। हालांकि, जैसे ही बाघ को इंसान की पहचान होती है, वह अक्सर उसे छोड़ देता है।
वन विभाग ने लोगों से आग्रह किया है कि वे सूर्योदय के बाद ही वन्यक्षेत्र में प्रवेश करें और सूर्यास्त होने से पहले हर हाल में सुरक्षित वापस लौट आएं। इसके अलावा, किसी भी स्थिति में अकेले जंगल में न जाएं और हमेशा समूह बनाकर ही प्रवेश करें ताकि ऐसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सके।
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