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'उनका जीवन और आदर्श असीम प्रेरणा के स्रोत', पीएम मोदी ने एनटीआर को श्रद्धांजलि दी


नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महान अभिनेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदामुरी तारक रामाराव (एनटीआर) को उनकी 103वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका जीवन और आदर्श पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महान अभिनेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदामुरी तारक रामाराव (एनटीआर) को उनकी 103वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका जीवन और आदर्श पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "महान एनटीआर गारू को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उन्हें जन कल्याण और सुशासन के प्रति उनके समर्पण के लिए प्यार से याद किया जाता है, जिसने गरीबों और वंचितों को गरिमा प्रदान की। सिनेमा के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करता है। उनका जीवन और उनके आदर्श आज भी असीम प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। आंध्र प्रदेश में एनडीए सरकार, मेरे मित्र चंद्रबाबू नायडू गारू के नेतृत्व में लोगों के लिए उनके द्वारा संजोए गए सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

नंदामुरी तारक रामाराव (1923-1996), जिन्हें लोकप्रिय रूप से एनटीआर के नाम से जाना जाता है, एक जाने-माने भारतीय अभिनेता, फिल्म निर्माता और राजनेता थे। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और तेलुगु सिनेमा को आकार देने में एक अहम भूमिका निभाई, खासकर भगवान कृष्ण जैसे पौराणिक किरदारों को निभाने के जरिए।

28 मई 1923 को आंध्र प्रदेश के निम्मकुरु में जन्मे एनटीआर ने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत एक सरकारी सब-रजिस्ट्रार के तौर पर की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए इस पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 1949 में फिल्म 'माना देशम' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की और जल्द ही तेलुगू सिनेमा के अग्रणी अभिनेताओं में से एक बन गए।

एनटीआर को 'माया बाजार' (1957) और 'दाना वीरा सूरा कर्ण' (1977) जैसी फिल्मों में हिंदू पौराणिक पात्रों के चित्रण के लिए व्यापक रूप से सराहा गया। उनकी ऑन-स्क्रीन उपस्थिति और लोकप्रियता ने उन्हें 'विश्व विख्यात नट सार्वभौम' की उपाधि दिलाई, जिसका अर्थ है 'अभिनय की दुनिया के विश्व-प्रसिद्ध सम्राट'। उनकी इस फिल्मी छवि ने बाद में उन्हें जमीनी स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक जनाधार बनाने में भी मदद की।

60 वर्ष की आयु में एनटीआर ने राजनीति में प्रवेश किया और 1982 में तेलुगू गौरव और आत्म-सम्मान के आधार पर तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) की स्थापना की। 1983 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में टीडीपी ने ऐतिहासिक और जबरदस्त जीत हासिल की, जिससे राज्य में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वर्चस्व समाप्त हो गया।

वे अविभाजित आंध्र प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। उनकी सरकार को जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए व्यापक रूप से सराहा गया; इनमें रियायती चावल योजना भी शामिल थी, जिसके तहत 2 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चावल उपलब्ध कराया जाता था, और इसके साथ ही कई ग्रामीण विकास पहलें भी शुरू की गई थीं।

1984 में जब एनटीआर संयुक्त राज्य अमेरिका में हृदय की शल्य-चिकित्सा (हार्ट सर्जरी) से उबर रहे थे, तब नदेंडला भास्कर राव के नेतृत्व में हुए एक राजनीतिक तख्तापलट के कारण उन्हें कुछ समय के लिए सत्ता से हटा दिया गया था। हालांकि, उन्होंने जबरदस्त वापसी की और व्यापक जनसमर्थन के चलते उन्हें पुनः उनके पद पर बहाल कर दिया गया।

एनटीआर 1994 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 1995 में उनके दामाद नारा चंद्रबाबू नायडू ने ज्यादातर विधायकों के समर्थन से पार्टी की कमान संभाल ली।

मुख्यमंत्री नायडू ने भी सोशल मीडिया पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने तेलुगू में लिखा कि सिनेमा की दुनिया में, उन्होंने राम और कृष्ण के रूप में एक अमिट छाप छोड़ी; वहीं राजनीति के क्षेत्र में, वे एक ध्रुव तारे की तरह चमके। मुख्यमंत्री ने कहा, "वे एक आधुनिक समाज सुधारक थे, जिन्होंने तेलुगू लोगों के जीवन में बड़े बदलाव लाए। मैं उस महान हस्ती को एक बार फिर अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"

--आईएएनएस

पीएसके

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