
सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में सोशल मीडिया पर रील बनाने का शौक एक मासूम की जान पर बन आया। काशीराम आवास कॉलोनी में स्थित एक जर्जर पानी की टंकी पर रील बनाने चढ़े पांच बच्चों के साथ बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। टंकी के ऊपर 16 घंटे तक फंसे रहे दो अन्य बच्चों को रविवार सुबह भारतीय वायुसेना (IAF) ने एमआई-17 हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला।
घटना शनिवार दोपहर करीब 3 बजे की है। 12 वर्षीय बाले अपने मौसेरे भाई दीपचंद के घर आया हुआ था। वह अपने चार दोस्तों—गोलू (15), शनि (11), कल्लू (15) और पवन (16)—के साथ 60 फीट ऊंची जर्जर पानी की टंकी पर रील बनाने के लिए चढ़ गया। रील बनाने के बाद जब वे नीचे उतरने लगे, तो अचानक टंकी की जर्जर लोहे की सीढ़ी टूट गई।
हादसे में बाले, शनि और गोलू सीधे नीचे आ गिरे। बाले के ऊपर भारी मलबा गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शनि और गोलू की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, कल्लू और पवन ने सूझबूझ दिखाते हुए लोहे की रॉड पकड़ ली और दोबारा ऊपर चढ़ गए, जहां वे अगले 16 घंटे तक फंसे रहे।
प्रशासन के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन किसी चुनौती से कम नहीं था। टंकी के आसपास भारी दलदल होने के कारण हाइड्रॉलिक क्रेन मौके तक नहीं पहुंच पाई। बच्चों को बचाने के लिए रातभर 150 मीटर अस्थाई सड़क बनाने का काम चलता रहा। रात 3 बजे हुई मूसलाधार बारिश ने काम रोक दिया और हालात और बिगड़ गए। बच्चों की जान खतरे में देख डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी अभिषेक महाजन ने तत्काल सेना की मदद मांगी।
रविवार सुबह करीब 5:20 बजे गोरखपुर एयरबेस से वायुसेना का MI-17 हेलिकॉप्टर मौके पर पहुंचा। पायलटों ने बेहद कम विजिबिलिटी और खराब मौसम के बीच तालमेल बिठाया और टंकी के ऊपर फंसे दोनों बच्चों को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया। रेस्क्यू के बाद बच्चों को तुरंत गोरखपुर के एयरफोर्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
प्रशासन ने बच्चों तक रातभर रस्सी के जरिए खाना और पानी पहुंचाया था ताकि वे होश न खोएं। इस दर्दनाक हादसे ने जर्जर इमारतों की सुरक्षा और युवाओं में रील बनाने के बढ़ते खतरनाक क्रेज पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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