
इस्लामाबाद. दुनिया की नजरें आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहाँ दशकों बाद अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत होने जा रही है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक बड़े डेलिगेशन के साथ शनिवार (11 अप्रैल 2026) सुबह नूर खान एयरबेस पहुंचे. उनके स्वागत के लिए पाकिस्तान के आर्मी चीफ Field Marshal आसिम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार एयरपोर्ट पर मौजूद रहे.
वार्ता में देरी और ईरान की शर्तें
पीस टॉक्स की शुरुआत पहले सुबह 8 बजे होनी थी, लेकिन तकनीकी कारणों और अंतिम समय में हुई शर्तों के चलते अब यह दोपहर बाद शुरू होगी.
ईरान का रुख: ईरानी डेलिगेशन की अगुआई कर रहे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने साफ किया है कि वार्ता की सफलता दो शर्तों पर टिकी है- लेबनान में इजरायली हमलों पर पूर्ण रोक और अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई $7 बिलियन की ईरानी संपत्ति की बहाली.
अमेरिका का डेलिगेशन: जेडी वेंस के साथ इस टीम में डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल हैं.
क्यों अहम है यह बैठक?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे 'मेक-ऑर-ब्रेक' (बनेगा या बिगड़ेगा) पल बताया है. 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए दो हफ्तों के युद्धविराम (Ceasefire) को स्थायी शांति में बदलना ही इस बैठक का मुख्य लक्ष्य है. अगर यह वार्ता विफल होती है, तो मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर युद्ध फिर से शुरू होने का खतरा है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
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