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उत्तराखंड: मुख्यमंत्री धामी ने बच्चों के साथ मनाया 'फूलदेई', कहा- यह लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर

देहरादून, 14 मार्च (आईएएनएस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में 'लोकपर्व फूलदेई' मनाया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश वासियों को फूलदेई की शुभकामनाएं दीं।

देहरादून, 14 मार्च (आईएएनएस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में 'लोकपर्व फूलदेई' मनाया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश वासियों को फूलदेई की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री आवास में लोकपर्व फूलदेई, हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। पारंपरिक परिधान पहनकर आए बच्चों ने घर की देहरी पर फूल व चावल अर्पित किए और सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। बच्चों ने 'फूल देई-छम्मा देई, जतुके दियाला-उतुके सई' जैसे लोकगीत गाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें उपहार भेंट किए।

सीएम धामी ने कहा कि 'लोकपर्व फूलदेई' राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान के भाव को बनाए रखने का त्योहार है। उन्होंने कहा कि यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति की सुंदरता और जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है। यह त्योहार दर्शाता है कि जीवन में हमेशा प्रकृति का आभार व्यक्त करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमने अपने लोक त्योहारों को धूमधाम से मनाना चाहिए, जिससे कि यह त्योहार आने वाली पीढ़ी तक पहुंचे और हमारी लोक संस्कृति हमेशा अमर रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, बसंत के स्वागत और हमारी लोक संस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला 'फूलदेई पर्व' हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और आने वाली पीढ़ियों को इन अमूल्य परंपराओं से परिचित कराने की प्रेरणा देता है।

वहीं, सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "शासकीय आवास पर देवभूमि की समृद्ध लोकपरंपरा के प्रतीक 'लोकपर्व फूलदेई' के अवसर पर बच्चों का आगमन हुआ। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे इन नन्हे मेहमानों ने देहरी पर फूल और अक्षत सजाकर जब मधुर स्वर में 'फूलदेई, फूलदेई, छम्मा देई…' गाया, तो वातावरण बसंत की खुशबू से परिपूर्ण हो उठा। इन बच्चों की सरलता, उल्लास और आत्मीयता हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की जीवंत झलक है। सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए ईश्वर से मंगलकामना करता हूं।'

--आईएएनएस

डीसीएच/

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