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वर्क प्लेस पर कामकाजी मांओं के लिए क्यों नहीं हैं बच्चों के कमरे, कंगना रनौत ने उठाया बड़ा सवाल


मुंबई, 1 जून (आईएएनएस)। आज के दौर में महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चुनौती आज भी वही है परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने की। खासकर मां बनने के बाद कई महिलाओं के लिए नौकरी और बच्चों की जिम्मेदारी को साथ लेकर चलना आसान नहीं होता। इसी मुद्दे को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने अपनी नई फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के प्रमोशन के दौरान खुलकर बात की है।

मुंबई, 1 जून (आईएएनएस)। आज के दौर में महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चुनौती आज भी वही है परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने की। खासकर मां बनने के बाद कई महिलाओं के लिए नौकरी और बच्चों की जिम्मेदारी को साथ लेकर चलना आसान नहीं होता। इसी मुद्दे को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने अपनी नई फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के प्रमोशन के दौरान खुलकर बात की है।

कंगना रनौत ने कहा कि अगर समाज और सरकार चाहते हैं कि महिलाएं बड़े पैमाने पर वर्कप्लेस पर सक्रिय रहें तो उन्हें बेहतर सुविधाएं और सहयोग भी दिया जाना चाहिए।

कंगना ने शूटिंग के दिनों को याद करते हुए कहा, ''मेरी को स्टार स्मिता तांबे की बेटियां अक्सर सेट पर आया करती थीं। वहीं अभिनेता अक्षत का बच्चा भी कई बार शूटिंग सेट पर मौजूद रहता था। बच्चे शूटिंग के बीच खाली समय में एक-दूसरे के साथ खेलते थे और कलाकार अपने काम में व्यस्त रहते थे। इन सबको देखकर मेरे मन में एक सवाल बार-बार उठता था कि आखिर काम की जगहों को इस तरह क्यों नहीं बनाया जाता? कामकाजी मांओं के लिए बच्चों के कमरे क्यों नहीं हैं? ''

कंगना रनौत ने कहा, ''आजकल वर्कप्लेस पर कर्मचारियों के लिए कई तरह की सुविधाओं की चर्चा होती है। कहीं प्रार्थना कक्ष बनाए जाते हैं तो कहीं अन्य जरूरतों को ध्यान में रखकर खास इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन बच्चों के लिए अलग कमरों या देखभाल की व्यवस्था बहुत कम देखने को मिलती है। जब महिलाओं को काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, तो यह भी जरूरी है कि उनके बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। यह केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक आवश्यक व्यवस्था होनी चाहिए।''

अभिनेत्री ने कहा, ''महिलाओं को वर्कप्लेस पर लाने और उन्हें लंबे समय तक काम से जुड़े रहने के लिए केवल नीतियां बनाना काफी नहीं है। इसके साथ ऐसी सुविधाएं भी जरूरी हैं जो उनके जीवन को आसान बना सकें। एक मां अपने बच्चे की चिंता से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकती। अगर कार्यस्थल पर बच्चों के लिए सुरक्षित जगह हो, तो महिलाएं ज्यादा आत्मविश्वास और सुकून के साथ अपना काम कर पाएंगी।''

कंगना रनौत ने इस विषय को सरकार की सोच और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, ''देश में महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें हर क्षेत्र में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। यह एक सराहनीय कदम है, लेकिन इसके साथ आने वाली चुनौतियों को भी समझना होगा। जब बड़ी संख्या में महिलाएं वर्कप्लेस में आएंगी, तब बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों का सवाल और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा।''

अपने बयान में कंगना ने कहा, ''आज कई महिलाओं के सामने ऐसी स्थिति आ जाती है, जहां उन्हें परिवार और करियर में से किसी एक को प्राथमिकता देनी पड़ती है। कई बार उचित सहयोग न मिलने के कारण महिलाएं अपने पेशेवर सपनों से समझौता कर लेती हैं। अगर समाज सच में महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ते देखना चाहता है तो उन्हें मजबूत सहायता व्यवस्था देनी होगी। केवल महिलाओं से उम्मीद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए अनुकूल माहौल तैयार करना भी उतना ही जरूरी है।''

कंगना रनौत का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा होने वाला है। जैसे-जैसे ज्यादा महिलाएं नेतृत्व की भूमिकाओं में आएंगी और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाएंगी, वैसे-वैसे बच्चों की देखभाल से जुड़ी सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ेगी। इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए ताकि भविष्य में महिलाओं को करियर और परिवार के बीच कठिन चुनाव न करना पड़े।

--आईएएनएस

पीके/वीसी

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