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'वे भी भगवान का रूप', स्ट्रीट डॉग्स को रिलोकेट करने के मामले पर मोहित चौहान ने रखे विचार

मुंबई, 4 जनवरी (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट के लावारिस कुत्तों को शेल्टर भेजने के आदेश को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच चर्चित गायक मोहित चौहान ने इस मामले में अपनी स्पष्ट राय रखी और बताया कि उनका मानना है कि कोर्ट का आदेश समाधान नहीं, बल्कि समस्याएं बढ़ा सकता है।

मुंबई, 4 जनवरी (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट के लावारिस कुत्तों को शेल्टर भेजने के आदेश को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच चर्चित गायक मोहित चौहान ने इस मामले में अपनी स्पष्ट राय रखी और बताया कि उनका मानना है कि कोर्ट का आदेश समाधान नहीं, बल्कि समस्याएं बढ़ा सकता है।

मोहित चौहान ने कहा, "स्ट्रीट डॉग्स को शेल्टर में भेजना या रिलोकेट करना कोई समाधान नहीं है। शेल्टर कितने बड़े हैं, उनमें कितने कुत्तों को रखा जा सकता है, उन्हें कौन मॉनिटर करेगा, कौन उन्हें खाना देगा, और फंड्स कहां से आएंगे? ये सब भी देखना जरूरी है। अगर उन्हें शेल्टर में रखा गया तो इससे बीमारियां फैलने की संभावना बढ़ेगी और यह जानवरों के लिए क्रूरता होगी। स्ट्रीट डॉग्स शेल्टर में वैसे नहीं रह पाएंगे। इसलिए रिलोकेशन कोई समाधान नहीं है।"

उन्होंने कहा कि इस समस्या का सही समाधान एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम के माध्यम से ही संभव है।

मोहित ने कहा, ''एबीसी कार्यक्रम वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए। जहां कुत्ते रहते हैं, वहीं उनका बर्थ कंट्रोल और टीकाकरण किया जाए। नगर निगम के कर्मचारियों को स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। मैं खुद तकरीबन 400 कुत्तों को सात-आठ साल से खाना खिलाता हूं। मेरी संस्था जानवरों के लिए काम करती है। कई और संस्थाएं भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर इसमें मदद कर सकती हैं। यही एक सही समाधान है। लावारिस कुत्तों की देखभाल करना समाज की जिम्मेदारी है। उन्हें किसी दूसरी जगह भेज देना पर्याप्त नहीं है।''

मोहित ने अपने बयान में धार्मिक और नैतिक दृष्टिकोण भी साझा किया। उन्होंने कहा, "पूजा-पाठ और मेडिटेशन के माध्यम से हम भगवान से जुड़ते हैं। जब भी मैं मंदिर जाता हूं और देखता हूं कि हमारे काल भैरव के साथ हमेशा श्वान होते हैं, तो हम उन्हें पूजते हैं, उनका सम्मान करते हैं, और उनसे प्रार्थना करते हैं। कुत्ते भी भगवान का रूप होते हैं। हमारा धर्म हमें सिखाता है कि अच्छा काम करें, दान और सेवा करें, और बेजुबानों की रक्षा करें। कई साधु-संतों की वाणियां यह कहती हैं कि श्वान बेजुबान जरूर हैं, लेकिन अगर आप उन्हें प्रताड़ित करते हैं और उनका दर्द सुनाई देता है, तो उसका पाप ब्रह्मांड में जाता है और उसे भुगतना पड़ता है।"

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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