मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के हक की लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आखिरकार अपना 18 दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया है। प्रशासन द्वारा प्रभावित गांवों का नए सिरे से सत्यापन कराने और छूटे हुए परिवारों के नाम जोड़ने का लिखित और आधिकारिक भरोसा दिए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया।
मां के आग्रह और प्रशासन के आश्वासन पर टूटा अनशन
जय किसान संगठन और चिता आंदोलन के प्रमुख अमित भटनागर की हालत लगातार भूख हड़ताल के कारण काफी बिगड़ गई थी। 19 जुलाई को धरना स्थल से हटाकर उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्होंने वहां भी भोजन लेने से इनकार कर दिया था।
अमित के भाई अंकित के अनुसार, लगातार 18 दिनों तक भूखे रहने से उनका स्वास्थ्य चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया था। आखिरकार 23 जुलाई को अपनी मां के भावुक आग्रह और छतरपुर व पन्ना प्रशासन के भरोसे के बाद उन्होंने आदिवासी महिलाओं के हाथों नारियल पानी पीकर अपना अनशन समाप्त किया।
202 करोड़ का अतिरिक्त पैकेज और बढ़ा मुआवजा
आंदोलन के बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने विस्थापितों के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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मुआवजा राशि में वृद्धि: मोहन यादव सरकार ने प्रभावितों की मुआवजे की राशि को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार कर दिया है।
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अतिरिक्त बजट स्वीकृति: सरकार ने मझगाय डैम और रुंझ डैम परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के लिए 202.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त पैकेज स्वीकृत किया है।
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नए सिरे से सर्वे: प्रशासन ने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित सभी गांवों में दोबारा सर्वे कराने का आश्वासन दिया है, ताकि कोई भी पात्र परिवार सूची से बाहर न रहे।
ग्रामीणों की 'चूल्हा बंदी' और एकजुटता
यह आंदोलन केवल प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि जन-जन की भावना से जुड़ा रहा। अमित भटनागर के समर्थन में पन्ना और छतरपुर जिले की कई आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने अपने घरों में 'चूल्हा बंदी' कर दी थी। कई माताओं और बहनों ने अमित के समर्थन में खुद भी भोजन का त्याग कर दिया था।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों का समाधान कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई अन्य विसंगति पाई जाती है, तो उसकी जांच कर प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाएगा।
आंदोलन का अगला चरण: 'न्याय सत्याग्रह'
अनशन समाप्त करने के बावजूद अमित भटनागर और जय किसान संगठन ने यह स्पष्ट किया है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। संगठन अब प्रशासन द्वारा किए गए वादों और नए सर्वे की प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए 'न्याय सत्याग्रह' चलाएगा, ताकि हर एक प्रभावित परिवार को उसका उचित हक और मुआवजा मिल सके।
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