
नीमच जिले के सरवानिया महाराज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बागरेड गांव में शुक्रवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक बेकाबू जंगली सूअर का हमला आबादी वाले इलाके में हो गया। इस अचानक हुए हमले में दो महिलाओं सहित कुल सात ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वहीं, सूचना देने के बावजूद करीब दो घंटे तक वन विभाग की टीम के मौके पर न पहुंचने को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, सुबह-सुबह जंगली सूअर अचानक जंगल से भटककर गांव की घनी आबादी में दाखिल हो गया और सामने आने वाले हर राहगीर पर हमला करने लगा। इसी बीच वह गांव के निवासी रामनाथ योगी (50) के घर के भीतर घुस गया। घर में मौजूद परिवार को खतरे में देख रामनाथ ने अदम्य साहस का परिचय दिया और सूअर से अकेले ही भिड़ गए। इस खूनी संघर्ष के दौरान सूअर ने उन पर तीन बार जानलेवा वार किया, जबकि रामनाथ ने भी हिम्मत दिखाते हुए उसे दो बार उठाकर दूर फेंक दिया। सूअर के साथ हुए इस कड़े मुकाबले में रामनाथ का एक हाथ फ्रैक्चर हो गया और उनके सिर में भी गंभीर चोटें आई हैं।
इस हिंसक जंगली सूअर का हमला सिर्फ एक घर तक सीमित नहीं रहा। गांव की गलियों में दौड़ते हुए उसने भागीरथ धनगर (60), प्रेमचंद्र दर्जी (46), कमलाबाई बंजारा (60) और प्रेमबाई बंजारा (50) समेत कुल सात ग्रामीणों को बुरी तरह घायल कर दिया। सूअर के हमले में प्रेमबाई के पैर में काफी गहरी चोट आई है, जबकि अन्य घायलों के हाथ, पैर और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गंभीर जख्म हो गए हैं।
गांव में मचे इस कोहराम के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने डायल-112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम की मदद से पांच गंभीर घायलों को तुरंत नीमच जिला चिकित्सालय रेफर किया गया, जबकि दो अन्य मामूली रूप से चोटिल ग्रामीणों को इलाज के लिए मनासा के शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां सभी की स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की लाइव सूचना तत्काल वन विभाग को दे दी गई थी, लेकिन घोर लापरवाही के चलते करीब दो घंटे तक विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या रेस्क्यू दल मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे वन्यजीव की मौजूदगी के बीच ग्रामीणों को खुद ही अपनी जान बचानी पड़ी।
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