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यूएन में सांसद अरुण भारती ने रखा भारत का पक्ष, बोले- 'शांति निर्माण में राष्ट्रीय स्वामित्व होनी चाहिए सर्वोपरि'


न्यूयॉर्क, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के जमुई से सांसद अरुण भारती ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ईसीओएसओसी चैंबर में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग (पीबीसी) और अफ्रीकी संघ शांति व सुरक्षा परिषद (एयूपीएससी) के बीच आयोजित 9वीं वार्षिक बैठक में भारत का पक्ष का रखा।

न्यूयॉर्क, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के जमुई से सांसद अरुण भारती ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ईसीओएसओसी चैंबर में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग (पीबीसी) और अफ्रीकी संघ शांति व सुरक्षा परिषद (एयूपीएससी) के बीच आयोजित 9वीं वार्षिक बैठक में भारत का पक्ष का रखा।

अरुण भारती संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के लिए भारत के गैर-आधिकारिक संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में 19 से 23 अक्टूबर तक न्यूयॉर्क के दौरे पर हैं।

अपने वक्तव्य की शुरुआत में अरुण भारती ने इस बैठक के आयोजन के लिएसंयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग (पीबीसी) और अफ्रीकी संघ शांति व सुरक्षा परिषद (एयूपीएससी) के अध्यक्षों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बैठक आपसी सहयोग, समझ और अफ्रीकी स्वामित्व व नेतृत्व को मजबूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर संचालित शांति-निर्माण प्रयासों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने 2025 की शांति निर्माण संरचना समीक्षा के जुड़वां प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रस्तावों ने दोनों संस्थाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करने और वार्षिक परामर्शों की सिफारिशों पर अनुवर्ती कार्रवाई के लिए एक तंत्र बनाने का आह्वान किया था, और आज का संयुक्त विज्ञप्ति उसी दिशा में अगला कदम है।

भारती ने संयुक्त क्षेत्रीय दौरों और किसी देश-विशेष के संदर्भ में सहयोग जैसी प्रस्तावित व्यावहारिक व्यवस्थाओं पर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि ऐसी सभी सहयोगी व्यवस्थाएं लचीली हों, दोनों संस्थाओं के अपने-अपने अधिदेशों का सम्मान करें और पूरी तरह संबंधित देश की प्राथमिकताओं के अनुरूप हों।

उन्होंने कहा कि शांति निर्माण में 'राष्ट्रीय स्वामित्व' सर्वोपरि सिद्धांत होना चाहिए। शांति निर्माण की जरूरतों और प्राथमिकताओं को तय करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित देश की सरकार की है। इसलिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहायता मांग-आधारित होनी चाहिए, जो मेजबान देश के अनुरोध और सहमति से दी जाए, उसकी प्राथमिकताओं के अनुरूप हो, और राष्ट्रीय प्रयासों की पूरक बने, कभी उनका विकल्प नहीं। उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत संयुक्त गतिविधियों और क्षेत्रीय दौरों पर भी समान रूप से लागू होता है।

वित्तपोषण के विषय पर अरुण भारती ने संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण कोष, अफ्रीकी विकास बैंक और अन्य साझेदारों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई, ताकि प्रयासों में बिखराव न हो और बाहर से थोपे गए दृष्टिकोणों से बचा जा सके।

समावेशी विकास और सामाजिक न्याय के प्रश्न को रेखांकित करते हुए अरुण भारती ने कहा कि शांति तभी टिकाऊ होती है, जब वह समावेशी हो। उन्होंने संयुक्त विज्ञप्ति में शांति निर्माण में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को मिली मान्यता का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि आज मानव-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की क्षमता रखती है, जिससे जनता का भरोसा और संस्थाओं की मजबूती बढ़ती है और अंततः स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होता है। उल्लेखनीय है कि भारत ने आधार, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में विश्व स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत किया है।

अपने वक्तव्य के समापन में अरुण भारती ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण 'वसुधैव कुटुम्बकम्' - अर्थात् पूरा विश्व एक परिवार है - की सभ्यतागत भावना से निर्देशित है। उन्होंने कहा कि भारत ने भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से क्षमता निर्माण सहित मांग-आधारित साझेदारियों का समर्थन किया है, और भारत अपने अफ्रीकी साझेदारों की राष्ट्रीय शांति-निर्माण प्राथमिकताओं के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है।

--आईएएनएस

डीसीएच/

Date & Time : 2026-10-22 11:05:03

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