
रियाद/दोहा. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध अब अपने 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है. बुधवार को ईरान द्वारा कतर के दुनिया के सबसे बड़े गैस प्लांट 'रास लफान' (Ras Laffan) पर किए गए मिसाइल हमले ने पूरे अरब जगत को हिला कर रख दिया है. इस हमले के विरोध में आज सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसमें 12 मुस्लिम देशों ने एकजुट होकर ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है.
सऊदी अरब की दो-टूक: 'जवाब देने की ताकत रखते हैं'
सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि रियाद चुपचाप तमाशा नहीं देखेगा. उन्होंने कहा:
"ईरान हमारे धैर्य की परीक्षा लेना बंद करे. हमारे पास अपनी और अपने पड़ोसियों की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पर्याप्त सैन्य ताकत है. कतर के रिहायशी इलाकों और आर्थिक केंद्रों पर हमले सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
मुस्लिम देशों की नाराजगी के मुख्य बिंदु
रियाद बैठक के बाद जारी साझा बयान में 12 देशों (जिनमें UAE, कुवैत और बहरीन भी शामिल हैं) ने निम्नलिखित बातें कही हैं:
नागरिक सुरक्षा: ईरान द्वारा रिहायशी और नागरिक बुनियादी ढांचों (Civilian Infrastructure) को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है.
ऊर्जा सुरक्षा: रास लफान प्लांट पर हमला न केवल कतर, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा है.
तत्काल युद्धविराम: सभी देशों ने ईरान से अपनी आक्रामक गतिविधियों को तुरंत रोकने की मांग की है.
जंग का 20वां दिन: अब तक क्या हुआ?
हमले की वजह: ईरान का दावा है कि उसने यह हमला इजराइल द्वारा उसके 'साउथ पार्स' गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में किया है.
नुकसान: कतर एनर्जी के मुताबिक, रास लफान प्लांट को काफी नुकसान पहुँचा है और वहां भीषण आग लग गई थी.
अमेरिकी रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने कतर पर दोबारा हमला किया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर देगा.
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