
सतना स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल से इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। अस्पताल परिसर की मेटरनिटी विंग के पास गुरुवार सुबह सफाई कर्मचारियों को डस्टबिन में 1.7 किलो का मृत भ्रूण पड़ा मिला। सफाई के दौरान नवजात का शव देखते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों ने तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचित किया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने जब अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो 4 और 5 नवंबर की दरमियानी रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच एक महिला डस्टबिन में कुछ संदिग्ध वस्तु फेंकती हुई नजर आई। एक कैमरे में महिला का चेहरा कपड़े से ढंका हुआ था, जबकि दूसरे कैमरे में उसकी पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज हो गई।
जांच के दौरान अस्पताल में बुधवार देर रात भर्ती हुई पन्ना जिले की एक महिला पर संदेह गहरा गया। ड्यूटी डॉक्टर डॉ. हर्षा भठीजा के अनुसार, परिजनों ने महिला का तीन माह का गर्भपात होने और बच्चे की गर्भनाल (प्लेसेंटा) गर्भाशय में फंसे होने की बात कहकर उसे भर्ती कराया था। जब डॉक्टर ने उपचार के दौरान नाल बाहर निकाली, तो उसके आकार से यह स्पष्ट हुआ कि गर्भ तीन महीने का नहीं बल्कि लगभग पूर्ण अवधि का था।
सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि महिला 'रिटेन्ड प्लेसेंटा' की गंभीर शिकायत लेकर आई थी। उसने स्वीकार किया था कि उसका प्रसव हो चुका है, लेकिन भ्रूण के बारे में सही जानकारी नहीं दी। सीसीटीवी फुटेज से मिलान के बाद जब डॉक्टरों और प्रबंधन ने महिला से पूछताछ की, तो उसने डस्टबिन में मिले भ्रूण को अपना मानने से साफ इनकार कर दिया।
सच्चाई का पता लगाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने डीएनए जांच का निर्णय लिया है। आरएमओ डॉ. अभिनव चौरसिया और सहायक प्रबंधक डॉ. धीरेंद्र वर्मा ने भ्रूण को सुरक्षित रखने के लिए मॉर्च्युरी के डीप फ्रीजर में रखवाया और विधिक प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने स्थानीय पुलिस को पूरे घटनाक्रम की लिखित सूचना दे दी है। सिविल सर्जन ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। महिला का डीएनए सैंपल लेकर मृत भ्रूण के डीएनए से मिलान कराया जाएगा। पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही वैधानिक कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
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