भोपाल। में 23 अप्रैल 2026 को 8वें ‘पोषण पखवाड़ा’ का भव्य समापन हुआ, जहां महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बच्चों के सर्वांगीण विकास और पोषण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
कार्यक्रम में मंत्री भूरिया ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर बताया कि मानव मस्तिष्क का अधिकांश विकास जीवन के शुरुआती 6 वर्षों में ही हो जाता है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक के ‘प्रथम 1000 दिन’ सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जिनमें सही पोषण और देखभाल से एक मजबूत और स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण संभव है।
उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि स्वस्थ माँ ही स्वस्थ समाज की नींव होती है। शिशु पोषण पर जोर देते हुए उन्होंने ‘कोलोस्ट्रम’ यानी माँ के पहले दूध को नवजात के लिए पहला टीका बताया और जन्म से 6 माह तक केवल स्तनपान को अनिवार्य बताया।
इसके साथ ही उन्होंने 6 माह के बाद बच्चों को संतुलित और पौष्टिक ऊपरी आहार देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उनकी शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित न हो। आधुनिक जीवनशैली को लेकर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए और उन्हें खेल-आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करना चाहिए।
पोषण पखवाड़ा अभियान के दौरान मध्यप्रदेश ने ‘जन आंदोलन पोर्टल’ पर गतिविधियों की प्रविष्टि में देशभर में तीसरा स्थान हासिल किया। इस अभियान के माध्यम से कुपोषण को दूर करने, स्तनपान को बढ़ावा देने और बच्चों के प्रारंभिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और कुपोषण निवारण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। मंत्री भूरिया ने इन्हें ‘पोषण योद्धा’ बताते हुए उनके योगदान की सराहना की।
साथ ही आयोजित ‘पोषण प्रदर्शनी’ में स्थानीय मोटे अनाज और संतुलित आहार के मॉडलों को प्रस्तुत किया गया, जिसे मंत्री ने सराहा और कहा कि यह अभियान केवल 15 दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर घर की आदत बनना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी ने बच्चों के बेहतर पोषण और मस्तिष्क विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की शपथ ली।
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