
जबलपुर. नगर निगम की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और शहर की समस्याओं का वास्तविक आकलन करने के लिए नवनियुक्त निगमायुक्त अग्रिम कुमार ने पदभार संभालने के दूसरे ही दिन मैदानी निरीक्षण शुरू कर दिया। गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे वे अधिकारियों की टीम के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में पहुंचे और सफाई, पेयजल आपूर्ति तथा सीवर व्यवस्था की स्थिति देखी। निरीक्षण के दौरान गढ़ा फाटक में जल रिसाव की समस्या सामने आने पर संबंधित उपयंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
निगमायुक्त अग्रिम कुमार ने रानीताल, सर्वोदय नगर, आगा चौक, गढ़ा फाटक सहित ललपुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे। अधिकारियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में चल रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित विभागों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण का उद्देश्य शहर की बुनियादी सुविधाओं में आ रही समस्याओं की पहचान करना और उनके समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा। निगमायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि मैदानी स्तर पर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए, ताकि नागरिकों को बार-बार एक ही समस्या का सामना न करना पड़े।
गढ़ा फाटक क्षेत्र में जल रिसाव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए निगमायुक्त ने संबंधित उपयंत्री के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इस कार्रवाई से अधिकारियों को यह संदेश दिया गया कि पेयजल जैसी आवश्यक सेवा से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
शहर में पानी की बर्बादी रोकने, पाइपलाइन संबंधी शिकायतों पर ध्यान देने और समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में नियमित रूप से निरीक्षण करें और समस्याओं के समाधान की प्रगति पर नजर रखें।
शहर की स्वच्छता व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए नगर निगम अब रेड, येलो और ग्रीन जोन आधारित प्रणाली पर काम करेगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत क्षेत्रों की सफाई संबंधी स्थिति के अनुसार प्राथमिकताएं तय की जाएंगी, जिससे जरूरत वाले स्थानों पर कर्मचारियों और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य अधिक गंदगी वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता देना है। जोन के आधार पर निगरानी होने से संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्र की स्थिति का आकलन करने और कमियों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
निगमायुक्त ने सफाई कर्मचारियों की सुबह की पाली में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। निर्देशों के अनुसार, स्वच्छता अमले को निर्धारित समय पर फील्ड में पहुंचकर काम करना होगा। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन और जल प्रदाय विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सफाई और जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का प्रभावी समाधान हो सके।
ललपुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के दौरान सीवर प्रबंधन को आधुनिक बनाने पर भी ध्यान दिया गया। भूमिगत सीवर लाइनों से संबंधित शिकायतों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और उनके निराकरण की निगरानी के लिए GPS आधारित मोबाइल एप्लिकेशन तैयार करने की योजना है।
इस प्रणाली के माध्यम से शिकायतों की लोकेशन दर्ज करने और उनके समाधान की समयसीमा पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। इससे संबंधित विभागों को समस्या वाले स्थान तक पहुंचने, कार्रवाई की स्थिति जानने और शिकायतों के लंबित रहने के कारणों की समीक्षा करने में सुविधा होगी।
हालांकि, इस योजना की प्रभावशीलता ऐप के कार्यान्वयन, शिकायतों की नियमित निगरानी और निर्धारित समय में कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था में काम करने वाले सफाई मित्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं। कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि काम के दौरान जोखिम कम किया जा सके।
इसके साथ ही सफाई मित्रों को राज्य शासन द्वारा निर्धारित मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। प्रत्यक्ष भुगतान से पारदर्शिता बढ़ाने और कर्मचारियों तक उनकी राशि समय पर पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।
निगमायुक्त अग्रिम कुमार के शुरुआती निरीक्षण से स्पष्ट है कि नगर निगम की सफाई, पेयजल और सीवर जैसी बुनियादी सेवाओं की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुबह के समय मैदानी निरीक्षण, अधिकारियों की जवाबदेही, जोन आधारित सफाई और GPS तकनीक के इस्तेमाल जैसी पहल शहर की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती हैं।
अब इन निर्देशों का वास्तविक असर इनके नियमित क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। यदि संबंधित विभाग तय समयसीमा के भीतर शिकायतों का निराकरण करते हैं और मैदानी स्तर पर निगरानी जारी रहती है, तो जबलपुर के नागरिकों को सफाई, जल रिसाव और सीवर संबंधी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
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