
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी महकमों में वर्षों से लंबित विभागीय जांचों (Departmental Inquiries) को तेजी से निपटाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बना दिया है। इस नए बदलाव के बाद अब आरोपित अधिकारी और कर्मचारियों को हर छोटी सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्य बाध्यता नहीं रहेगी।
नए संशोधनों के तहत अब जांच अधिकारी आरोपित कर्मचारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से पेश होने की अनुमति दे सकेंगे। इससे न केवल कर्मचारियों का समय बचेगा, बल्कि बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने की प्रक्रिया खत्म होने से जांच में तेजी आएगी। इसके साथ ही, अब सूचना या नोटिस भेजने के पारंपरिक तरीकों के बजाय अधिकृत ई-मेल का उपयोग किया जाएगा। ई-मेल पर भेजे गए नोटिस को अब विधिवत सूचना माना जाएगा, जिससे अक्सर 'नोटिस नहीं मिलने' का बहाना बनाकर जांच टालने वाली प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगेगी।
इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार एक ऑनलाइन पोर्टल आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू कर रही है। अब जांच से जुड़ी हर गतिविधि पोर्टल पर दर्ज होगी, जिससे वरिष्ठ अधिकारी हर स्तर पर प्रगति की निगरानी कर सकेंगे। अब तक नियमों की जटिलता का फायदा उठाकर कई कर्मचारी जांच को अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) तक खींच ले जाते थे, जिसके कारण उनकी पेंशन और अन्य लाभ भी अटक जाते थे। नई व्यवस्था से ऐसे मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले दिनों विभिन्न विभागों में लंबित जांचों की समीक्षा के दौरान गहरी नाराजगी जताई थी। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद ही सामान्य प्रशासन विभाग ने इन नियमों में बदलाव की फाइल को गति दी। इस कदम से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि शासन के प्रति जवाबदेही भी मजबूत होगी।
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