
भोपाल. मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट दर (पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या) को कम करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक ऐतिहासिक पहल की है. अब राज्य में शिक्षक बच्चों पर स्कूल नहीं थोपेंगे, बल्कि उनसे पूछेंगे कि वे किस स्कूल में पढ़ना चाहते हैं. कक्षा 5वीं, 8वीं और 10वीं पास करने वाले छात्रों को उनकी पसंद के स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा.
फरवरी से शुरू होगी प्रक्रिया, मार्च से नया सत्र
पिछले सत्र में लगभग 1.77 लाख बच्चों द्वारा अगली कक्षा में प्रवेश न लेने के चौंकाने वाले आंकड़ों ने सरकार को रणनीति बदलने पर मजबूर किया है.
जल्द शुरुआत: प्रवेश प्रक्रिया 15 फरवरी तक पूरी कर ली जाएगी.
अगेता सत्र: नया शैक्षणिक सत्र इस बार अप्रैल के बजाय मार्च से ही शुरू हो जाएगा.
प्रोविजनल एडमिशन: शिक्षक 'हमारे शिक्षक ऐप' के माध्यम से छात्र की पसंद दर्ज करेंगे और उन्हें तुरंत प्रोविजनल प्रवेश देंगे.
बिना दस्तावेज भी मिलेगा प्रवेश
शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी छात्र को दस्तावेजों (Documents) की कमी के कारण प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा.
मैनेजमेंट सिस्टम: सभी स्कूलों का विवरण 'ट्रांजिशन मैनेजमेंट सिस्टम' और 'यू-डाइस (U-DISE)' कोड के साथ उपलब्ध रहेगा.
सरकारी योजनाओं का लाभ: मार्च तक ही पाठ्यपुस्तकें, साइकिल, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि पढ़ाई में कोई बाधा न आए.
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