
वाशिंगटन/तेहरान. मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुँच गया है। महीनों से चले आ रहे युद्ध के बाद हुए अस्थाई 'सीजफायर' (युद्धविराम) को दरकिनार करते हुए अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। ओमान की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकरों पर हुई हालिया बमबारी ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है।
ताजा सैन्य कार्रवाई के तहत अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ओमान की खाड़ी में जास्क के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस TV ने खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने जास्क के पास ईरानी समुद्री क्षेत्र से होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहे एक तेल टैंकर पर हमला किया। ईरान ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और सीजफायर का सीधा उल्लंघन करार दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया (Truth Social) पर बेहद कड़ा संदेश पोस्ट किया है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में खुलासा किया कि ईरानी सेना ने अमेरिकी जंगी जहाजों (Destroyers) पर हमला करने की कोशिश की थी, जिसका जवाब अमेरिकी सेना ने "बुरी तरह तबाह" करके दिया।
"ईरान ने हमारे जंगी जहाजों पर हमला करने की गलती की। हमने उनकी कई छोटी नौकाओं को डुबो दिया है और उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया है। मैं साफ कर देना चाहता हूँ—अगर तेहरान ने तुरंत नई डील नहीं की, तो हम और भी घातक हमले करेंगे। हम उन्हें परमाणु हथियार रखने का अधिकार कभी नहीं देंगे और अब वे इस बात पर सहमत हो रहे हैं।" - राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। तेहरान ने साफ किया है कि वे इस उकसावे वाली कार्रवाई का "बिना किसी देरी" के जवाब देंगे। ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे अपनी समुद्री सीमाओं और संसाधनों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल सप्लाई पर भी खतरा मंडराने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
ट्रंप के दावों के अनुसार, ईरान अब परमाणु हथियारों को छोड़ने की शर्तों पर नरम पड़ता दिख रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। जास्क और होर्मुज के पास हुई इस फायरिंग ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, खाड़ी क्षेत्र में बारूद की गंध कम नहीं होगी।
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