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तमिलनाडु में 'थलापति' विजय का राजतिलक अटका: TVK के 107 विधायकों की इस्तीफे की धमकी, 'दुश्मन' DMK-AIADMK में हुआ गुप्त समझौता!


चेन्नई. तमिलनाडु की राजनीति में आज वह दिन आ गया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। दशकों से एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे DMK और AIADMK अब एक मंच पर आते दिख रहे हैं। कारण है-सुपरस्टार विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की प्रचंड लहर। चुनाव नतीजों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी है, लेकिन बहुमत की दहलीज पर आकर मामला अटक गया है। इस सियासी गतिरोध ने चेन्नई की सड़कों पर समर्थकों का गुस्सा और राजभवन के भीतर सस्पेंस बढ़ा दिया है।

बहुमत का गणित: जादुई आंकड़े से 6 कदम दूर विजय

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। हालिया नतीजों ने सबको चौंका दिया:

  • TVK (विजय): 108 सीटें

  • कांग्रेस (समर्थक): 5 सीटें

  • कुल गठबंधन संख्या: 113 सीटें

  • पेच: विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता था, जिनमें से एक सीट छोड़ने के बाद यह आंकड़ा 112 रह जाएगा। यानी बहुमत के लिए अब भी 6 विधायकों की कमी है।

राजभवन का रुख और समर्थकों का 'संग्राम'

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गुरुवार को लोक भवन में विजय से मुलाकात की। राज्यपाल ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक विजय उन विधायकों की सूची पेश नहीं करते जो उन्हें समर्थन दे रहे हैं, तब तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जा सकता।

राज्यपाल के इस कड़े रुख के बाद चेन्नई में राजभवन के बाहर टीवीके समर्थकों ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

TVK का मास्टरस्ट्रोक: सामूहिक इस्तीफे का 'एटम बम'

विजय की पार्टी ने झुकने के बजाय आक्रामक रुख अपनाया है। टीवीके के 107 निर्वाचित विधायकों (विजय को छोड़कर) ने राज्यपाल को संदेश भेजा है कि यदि लोकतंत्र के खिलाफ जाकर किसी अन्य पार्टी को सरकार बनाने के लिए उकसाया गया, तो वे सभी सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे। इससे राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा और दोबारा चुनाव की स्थिति बन सकती है।

अजीबोगरीब गठबंधन: स्टालिन और EPS आए साथ?

सबसे बड़ा राजनीतिक धमाका तब हुआ जब सूत्रों ने खुलासा किया कि विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए कार्यवाहक मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (DMK) और एडप्पादी के. पलानीस्वामी (AIADMK) के बीच बातचीत हुई है।

खबर है कि EPS ने स्टालिन को समर्थन देने की पेशकश की है ताकि 'सिनेमाई राजनीति' को सत्ता से दूर रखा जा सके। EPS ने शुक्रवार को राज्यपाल से मिलने का समय माँगा है, जिससे इस 'महागठबंधन' की अटकलों को और हवा मिल गई है।

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