
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा अध्याय जुड़ गया जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के राज्यपाल आर.एन. रवि ने एक कड़ा और ऐतिहासिक संवैधानिक कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। राज्यपाल का यह निर्णय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव हारने के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद आए संवैधानिक संकट के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
राजभवन (कोलकाता) द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 174 (2) (बी) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया है। यह आदेश जारी होते ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल पुराने शासन का औपचारिक रूप से अंत हो गया है।
"चूंकि जनता का जनादेश स्पष्ट है और वर्तमान सरकार के पास बहुमत नहीं बचा है, अतः लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखने के लिए विधानसभा भंग करना अनिवार्य हो गया था।" - राजभवन, आधिकारिक विज्ञप्ति
2026 के इस चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ हुआ। वे अपनी पारंपरिक और बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली सीट भवानीपुर से भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी के हाथों 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गईं।
हार के बावजूद, ममता बनर्जी ने "धांधली" का आरोप लगाते हुए इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने मीडिया से कहा, "हम हारे नहीं हैं, हमें साजिश के तहत हराया गया है। जनता का जनादेश छीना गया है।" उनके इस रुख ने राज्य में एक बड़ा संवैधानिक गतिरोध पैदा कर दिया था, जिसे राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर समाप्त किया।
पश्चिम बंगाल की 293 सीटों (एक सीट पर चुनाव शेष) पर आए नतीजों ने सत्ता की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है:
भारतीय जनता पार्टी (BJP): 207 सीटें (स्पष्ट बहुमत)
तृणमूल कांग्रेस (TMC): 80 सीटें
अन्य/निर्दलीय: 6 सीटें
बहुमत का आंकड़ा: 148 सीटें
भाजपा ने 207 सीटों के साथ न केवल बहुमत के जादुई आंकड़े को पार किया, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी कर दी है। अब सभी की निगाहें फाल्टा सीट पर होने वाले मतदान (21 मई) और उसके बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।
विधानसभा भंग होने और कैबिनेट बर्खास्त होने के साथ ही अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। भाजपा विधायक दल के नेता जल्द ही राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की कमान संभाली है।
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