
वॉशिंगटन. ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष में अमेरिका ने अपने सबसे घातक हथियार 'टॉमहॉक क्रूज मिसाइल' का इतना अंधाधुंध इस्तेमाल किया है कि अब खुद उसके रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की नींद उड़ गई है. वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महज चार हफ्तों में अमेरिका ईरान पर 850 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें दाग चुका है.
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिकी नौसेना के पास कुल 4,000 टॉमहॉक मिसाइलों का जखीरा था. इस लिहाज से, युद्ध के शुरुआती एक महीने में ही अमेरिका ने अपने कुल स्टॉक का एक-चौथाई (25%) हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है.
2 साल में बनती है एक मिसाइल, कमी पूरी करना नामुमकिन!
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि एक टॉमहॉक मिसाइल को बनाने में लगभग 2 साल का समय लगता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस रफ्तार से मिसाइलें खर्च हो रही हैं, उस कमी को पूरा करने में अमेरिका को कई साल लग जाएंगे. अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो अमेरिका के पास न केवल अपने बचाव के लिए मिसाइलें कम पड़ेंगी, बल्कि वह यूरोप और एशिया में अपने सहयोगियों की मदद करने की स्थिति में भी नहीं रहेगा.
टॉमहॉक: बिना जमीन पर उतरे 'रिमोट वॉर'
अमेरिका ईरान पर पूरी तरह से 'स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक' कर रहा है. इसका मतलब है कि अमेरिकी सैनिकों को ईरानी जमीन पर कदम रखने की जरूरत नहीं पड़ रही है. टॉमहॉक मिसाइलों को समुद्र में मौजूद युद्धपोतों और पनडुब्बियों से दागा जा रहा है.
टॉमहॉक की ताकत: यह मिसाइल 1,000 मील (1609 किमी) दूर तक 1,000 पाउंड (453 किलो) विस्फोटक बिल्कुल सटीक निशाने पर गिरा सकती है. इसके एडवांस वर्जन की रेंज तो 2,500 किमी तक है.
1991 के बाद सबसे बड़ा मिसाइल अटैक
टॉमहॉक का इतना बड़ा हमला आखिरी बार 1991 के खाड़ी युद्ध (Gulf War) के दौरान देखा गया था. लेकिन मौजूदा 'ईरान ऑपरेशन' को अब तक का सबसे बड़ा और महंगा मिसाइल अभियान माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट और एशिया में बढ़ते वैश्विक खतरों के बीच, मिसाइलों के खत्म होते स्टॉक ने बाइडन प्रशासन के सामने रणनीतिक संकट खड़ा कर दिया है.
Leave A Reviews