
वॉशिंगटन/तेहरान. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार रात एक चौंकाने वाले फैसले में 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' (Project Freedom) को तत्काल प्रभाव से रोकने का ऐलान कर दिया है। यह सैन्य ऑपरेशन सोमवार सुबह ही शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ईरान द्वारा प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाना था। महज 48 घंटों के भीतर इस ऑपरेशन को बंद करना ट्रम्प प्रशासन की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यह फैसला पाकिस्तान की विशेष अपील के बाद लिया गया है। ट्रम्प ने कहा कि पाकिस्तान और अन्य देशों ने तनाव कम करने का अनुरोध किया था। साथ ही, ईरान के साथ एक 'पूर्ण और अंतिम समझौते' की दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है, जिसके कारण इस सैन्य एस्कॉर्ट को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि, ट्रम्प ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी घेराबंदी (Blockade) पहले की तरह जारी रहेगी।
ऑपरेशन की विफलता या सफलता को लेकर आंकड़े चौंकाने वाले हैं। युद्ध से पहले इस रास्ते से रोजाना करीब 130 जहाज गुजरते थे, लेकिन 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के दौरान:
सोमवार: सिर्फ 2 जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सका।
मंगलवार: केवल 1 जहाज ही पार हो पाया।
कुल: दो दिनों में मात्र 3 जहाज।
ईरान के सरकारी मीडिया ने इसे अपनी रणनीतिक जीत करार दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी नौसेना इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुलवाने में पूरी तरह नाकाम रही और अंततः ट्रम्प को दबाव में कदम पीछे खींचने पड़े।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को रोकना ईरान-इजरायल युद्ध के बीच एक संभावित युद्धविराम की कोशिश हो सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिए हैं कि सैन्य अभियान का शुरुआती चरण पूरा हो चुका है और अब कूटनीति के जरिए समाधान तलाशा जा रहा है।
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