
पारामारिबो। जमैका की सफल यात्रा संपन्न करने के बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने तीन कैरिबियाई देशों के दौरे के दूसरे चरण में सूरीनाम पहुँच गए हैं। सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो पहुँचने पर उनके समकक्ष मेल्विन बुवा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। जयशंकर की यह यात्रा कैरिबियाई क्षेत्र के देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय और रणनीतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अपनी यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए जयशंकर ने कहा कि पारामारिबो में उनका यह पहला दौरा है और वे यहाँ के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं को लेकर काफी सकारात्मक हैं।
सांस्कृतिक जड़ों और 'गिरमिटिया' समुदाय से जुड़ाव भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और सूरीनाम के बीच के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक हैं। सूरीनाम में 'गिरमिटिया' समुदाय की एक बड़ी आबादी निवास करती है। ये वे भारतीय मजदूर हैं जो 19वीं सदी के दौरान एक अनुबंध (Agreement) के तहत काम करने के लिए सूरीनाम गए थे और समय के साथ वहीं की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनकर बस गए। विदेश मंत्री का यह दौरा इस प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संबंधों को नवीनीकृत करने और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों को खोजने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
जमैका दौरे की उपलब्धियां और सहयोग के क्षेत्र सूरीनाम पहुँचने से पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने जमैका का दौरा किया, जहाँ भारत ने जमैका के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल अवसंरचना और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारत ने जमैका को पिछले साल आए विनाशकारी तूफान के बाद पुनर्निर्माण में सहायता देने के उद्देश्य से डायलिसिस यूनिट, मछली पकड़ने वाली नावें और जीपीएस (GPS) उपकरण प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी अस्थायी सीट के दावे के प्रति जमैका के समर्थन और आतंकवाद के विरुद्ध साझा वैश्विक रुख की सराहना की है।
अगला पड़ाव: त्रिनिदाद और टोबैगो सूरीनाम में अपने शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया पूरी करने के बाद, विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी इस कैरिबियाई यात्रा के अंतिम चरण में त्रिनिदाद और टोबैगो के लिए रवाना होंगे। इस संपूर्ण दौरे का व्यापक उद्देश्य 'एक्ट ईस्ट' की तर्ज पर कैरिबियाई देशों के साथ भारत की कूटनीतिक पहुंच को बढ़ाना और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना है। अपनी जमैका यात्रा के दौरान जयशंकर ने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की और विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया, जिससे भारत की 'सॉफ्ट पावर' को इस क्षेत्र में नई मजबूती मिली है।
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