Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत के लिए 18 प्रतिशत टैरिफ की अनिश्चितता घटी

नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ के खिलाफ दिए गए फैसले से भारत के लिए टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम हो गई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय ने एकतरफा टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्तियों पर स्पष्ट कानूनी सीमा तय कर दी है।

नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ के खिलाफ दिए गए फैसले से भारत के लिए टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम हो गई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय ने एकतरफा टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्तियों पर स्पष्ट कानूनी सीमा तय कर दी है।

गौरतलब है कि अंतरिम व्यापार व्यवस्था के तहत अमेरिका ने भारत पर पारस्परिक टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह व्यवस्था अप्रासंगिक हो गई है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और टैक्स कंट्रोवर्सी मैनेजमेंट लीडर मनोज मिश्रा ने कहा, “ऐसे टैरिफ लगाने का कोई भी प्रयास अब कांग्रेस की मंजूरी के बिना संभव नहीं होगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की संभावना है। साथ ही, बिना पर्याप्त कानूनी आधार पर वसूले गए टैरिफ की वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।”

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका रणनीतिक क्षेत्रों में सेक्शन 232 के तहत क्षेत्र-विशेष टैरिफ का सहारा ले सकता है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना जरूरी होगा, ताकि दीर्घकालिक टैरिफ स्थिरता और बाजार तक सुनिश्चित पहुंच मिल सके।

यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से व्यापक टैरिफ को खारिज करते हुए कहा कि 1977 के आपातकालीन कानून के तहत राष्ट्रपति को इतने व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखते हुए कहा, “राष्ट्रपति ने असीमित राशि, अवधि और दायरे में एकतरफा टैरिफ लगाने की असाधारण शक्ति का दावा किया है। ऐसे अधिकार के प्रयोग के लिए स्पष्ट रूप से कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है।”

उन्होंने यह भी कहा कि 1977 का वह कानून, जिसका हवाला देकर टैरिफ लगाए गए थे, कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक व्यापार में स्थिरता आएगी और भारत सहित अन्य व्यापारिक साझेदार देशों को राहत मिलेगी।

--आईएएनएस

डीएससी

Share:

Leave A Reviews

Related News