
आंध्रप्रदेश की राजधानी को लेकर वर्षों से जारी सस्पेंस अब खत्म होने की ओर है। केंद्र सरकार 1 अप्रैल को लोकसभा में ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य अमरावती को राज्य की एकमात्र आधिकारिक राजधानी का कानूनी दर्जा देना है।
यह पहल एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस विधेयक के पारित होने के बाद राजधानी को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी और राजनीतिक विवाद समाप्त होने की उम्मीद है।
यह संशोधन ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014’ में बदलाव के लिए लाया जा रहा है। 2014 में राज्य के विभाजन के बाद हैदराबाद को अधिकतम 10 वर्षों के लिए संयुक्त राजधानी बनाया गया था, जिसके बाद आंध्र प्रदेश को अपनी नई राजधानी विकसित करनी थी। हालांकि, उस समय अमरावती का स्पष्ट उल्लेख कानून में नहीं किया गया था, जिससे विवाद पैदा हुआ।
28 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा ने अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था, जिसे अब केंद्र के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
मुख्यमंत्री नायडू ने कहा है कि अमरावती को ‘ब्लू-ग्रीन सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा और 2028 तक इसे विश्वस्तरीय राजधानी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस विधेयक के पारित होने के बाद आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर चल रहा वर्षों पुराना विवाद समाप्त हो सकता है और राज्य के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
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