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अनूपपुर: केवई नदी पर बैराज निर्माण का विरोध, अनुबंध रद्द करने की मांग

अनूपपुर: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। एक निजी कंपनी द्वारा नदी पर बनाए जा रहे अनिकट और प्रस्तावित 9 बैराजों के निर्माण को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट में हुई जनसुनवाई में जमकर हंगामा हुआ। कोतमा क्षेत्र के जागरूक युवाओं और किसानों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए निर्माण कार्य पर तत्काल 'स्टॉप वर्क ऑर्डर' जारी करने की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए नदी के प्राकृतिक बहाव और भविष्य की पेयजल योजनाओं को दांव पर लगा दिया है।

नियमों की अनदेखी: बिना वैध EC के कैसे हुआ अनुबंध?

शिकायत में सबसे गंभीर सवाल पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) की वैधता पर उठाए गए हैं। युवाओं ने दस्तावेजी प्रमाणों के साथ बताया कि कंपनी की पुरानी ईसी 26 नवंबर 2022 को समाप्त हो चुकी थी, जबकि नई मंजूरी करीब तीन साल बाद 11 सितंबर 2025 को मिली। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अंतरिम अवधि (बिना वैध मंजूरी के समय) के दौरान ही 31 जुलाई 2025 को विभाग और कंपनी के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर कर दिए गए।

कानूनी विशेषज्ञों और प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जिस समय अनुबंध हुआ, उस समय कंपनी के पास वैध ईसी नहीं थी, इसलिए यह अनुबंध कानूनी रूप से शून्य (Void) है। इसके बावजूद नदी के बीचों-बीच कंक्रीट का अनिकट बनाया जा रहा है, जो ग्रीन बेल्ट और बफर जोन की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।

MoEF से जानकारी छिपाने का आरोप: ठप हो सकती है नल-जल योजना

प्रदर्शनकारियों ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि कंपनी ने पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC) को दिए आवेदन में तथ्यों को छिपाया है। आरोप है कि कंपनी ने सोन नदी से पानी लेने की अनुमति मांगी थी, लेकिन केवई नदी पर प्रस्तावित 9 बैराजों की जानकारी पूरी तरह छिपा ली। नियमों के अनुसार, भ्रामक जानकारी देना ईसी निरस्त करने का आधार है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि केवई नदी पर ये 9 बैराज बन गए, तो क्षेत्र में सरकार की करोड़ों की लागत से चल रही 'नल-जल योजना' और सीतामढ़ी सिंचाई परियोजना पूरी तरह सूख जाएगी। इससे भविष्य में हजारों किसानों और ग्रामीणों के सामने पानी का संकट खड़ा हो जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस मामले में एक माह पूर्व भी आवेदन दे चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। अब तक इस मामले में कोई जांच टीम गठित नहीं की गई है। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध निर्माण नहीं रोका गया और अनुबंध निरस्त नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन और न्यायालय की शरण लेने को विवश होंगे।

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