
अनूपपुर जिले के कोतमा जनपद पंचायत अंतर्गत बसखला गांव में संचालित जेएमएस (JMS) कंपनी के खिलाफ सोमवार को स्थानीय कर्मचारियों और किसानों ने मोर्चा खोल दिया। सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने कंपनी के मुख्य द्वार पर एकत्र होकर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन स्थानीय भूमिपुत्रों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहा है और श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
बाहरी बनाम स्थानीय: वेतन और सुविधाओं में भेदभाव का आरोप प्रदर्शन में शामिल उन किसानों ने भी हिस्सा लिया जिनकी जमीन पर कंपनी का संचालन हो रहा है। कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन 'बाहरी' और 'स्थानीय' कर्मचारियों के बीच दोहरी नीति अपना रहा है। मजदूरों के अनुसार, बाहर से आए कर्मचारियों को अधिक वेतन, बोनस और बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि स्थानीय मजदूरों को कम वेतन देकर उनका शोषण किया जा रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि "समान कार्य के लिए समान वेतन" के अधिकार से उन्हें वंचित रखा गया है।
नोटिस देकर डराने और दमनकारी नीति का विरोध मजदूरों ने बताया कि जब भी वे अपने हक या सुविधाओं की बात करते हैं, तो प्रबंधन उन्हें नौकरी से निकालने का नोटिस थमा देता है। कर्मचारियों ने इसे कंपनी की दमनकारी नीति करार देते हुए कहा कि उन्हें डरा-धमकाकर चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देना, बोनस में समानता लाना और नोटिस के जरिए किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाना शामिल है।
सात दिन का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच कंपनी प्रबंधन ने दखल दिया और मजदूरों को शांत कराने के लिए सात दिनों के भीतर उनकी लंबित मांगों पर विचार कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, मजदूरों और किसानों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी जायज मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे कंपनी का उत्पादन पूरी तरह ठप कर देंगे और आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।
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