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आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय, नई पीढ़ी को सच्चाई जाननी चाहिए: दीपक प्रकाश


नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। भाजपा नेता दीपक प्रकाश ने कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र और संविधान के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर क्षति पहुंचाई गई थी। साथ ही उन्होंने एनसीईआरटी द्वारा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल से संबंधित अध्याय शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया।

नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। भाजपा नेता दीपक प्रकाश ने कांग्रेस द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र और संविधान के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर क्षति पहुंचाई गई थी। साथ ही उन्होंने एनसीईआरटी द्वारा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल से संबंधित अध्याय शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया।

दीपक प्रकाश ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कांग्रेस आज लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात करती है, लेकिन 25 जून 1975 को उसी कांग्रेस सरकार ने देश में आपातकाल लागू कर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का काम किया था। उस दौर में संविधान की भावना को कमजोर किया गया, नागरिक अधिकारों को सीमित किया गया और लोकतंत्र की हत्या की गई। आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाने वाले लाखों लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया था। कई लोकतंत्र सेनानियों ने संघर्ष के दौरान यातनाएं झेलीं और अनेक लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन तक समर्पित कर दिया। आपातकाल का दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐसा अध्याय है जिसे इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

वहीं, एनसीईआरटी की नई पुस्तकों में आपातकाल पर अध्याय शामिल किए जाने के फैसले का समर्थन करते हुए दीपक प्रकाश ने कहा कि यह कदम वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को देश के इतिहास के उस महत्वपूर्ण दौर से परिचित कराने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यह जानना चाहिए कि किस प्रकार कांग्रेस शासन के दौरान लोकतंत्र, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित किया गया था। उस समय न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और गरिमा को कमजोर किया गया। आपातकाल के दौरान संस्थाओं की आत्मा को आघात पहुंचाया गया और सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ।

कांग्रेस द्वारा एनसीईआरटी के इस फैसले पर सवाल उठाए जाने को लेकर भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस के लिए इस विषय पर असहज होना स्वाभाविक है, क्योंकि आपातकाल उसके शासनकाल का हिस्सा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक इतिहास में कई बार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर करने का प्रयास किया। आपातकाल के बाद गठित शाह आयोग (शाह आयोग) की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए। आयोग की रिपोर्ट में आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं और नागरिक अधिकारों के हनन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज थे। देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि उस दौर में लोकतंत्र समर्थक लोगों और आम नागरिकों के साथ क्या हुआ था।

उन्होंने कहा कि इतिहास के इन तथ्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा को लेकर समाज अधिक जागरूक बन सके। कांग्रेस का इतिहास लोकतांत्रिक परंपराओं के समर्थन की बजाय उन्हें कमजोर करने की घटनाओं से जुड़ा रहा है और इसी कारण पार्टी आपातकाल से जुड़े मुद्दों पर असहज दिखाई देती है। आपातकाल के अध्याय को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने से छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी मिलेगी और वे संविधान तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

--आईएएनएस

पीएसके/वीसी

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