
बालाघाट जिले अंतर्गत किरनापुर तहसील के ग्राम पौनी में पदस्थ पटवारी गौरव घोंघड़े पर किसानों से राजस्व अभिलेखों में सुधार और कुआं-बोरवेल की प्रविष्टि दर्ज करने के एवज में अवैध वसूली करने का गंभीर मामला सामने आया है। चार किसानों द्वारा शपथ पत्र प्रस्तुत कर ऑनलाइन और नकद माध्यम से रिश्वत लेने के आरोप लगाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर आदित्य सिंह के निर्देश पर पटवारी गौरव घोंघड़े को हल्का प्रभार से तत्काल प्रभाव से हटाते हुए तहसीलदार कार्यालय किरनापुर की कानूनगो शाखा में अटैच कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किरनापुर एसडीएम कमल सिंहसार को सौंपी गई है।
प्रशासनिक फेरबदल के तहत पटवारी गौरव घोंघड़े के मूल प्रभार वाले हल्का नंबर 82 (पौनी) और अतिरिक्त प्रभार वाले हल्का नंबर 83 (पीपलगांव बुजुर्ग) का प्रभार पटवारी उमेश सहारे को सौंप दिया गया है, ताकि ग्रामीणों के नियमित राजस्व कार्य बाधित न हों। किसानों ने अपनी लिखित शिकायत में डिजिटल लेन-देन के पुख्ता प्रमाण संलग्न करते हुए फोन-पे (PhonePe) के जरिए ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करने की विस्तृत जानकारी दर्ज कराई है।
पीड़ित किसानों द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र के अनुसार, हल्का पटवारी द्वारा शासकीय कार्यों के निष्पादन के लिए तय मानकों के विपरीत खुलेआम रुपयों की मांग की जा रही थी। किसान ज्ञानदास मातरे ने अभिलेख सुधार के नाम पर 4,000 रुपए और महरलाल नागफांसे ने 2,500 रुपए फोन-पे के माध्यम से ऑनलाइन देने की बात कही है। वहीं तीसरे किसान सूरज मानकर ने पटवारी को 2,500 रुपए नकद सौंपने का आरोप लगाया है।
चौथे किसान महायल नागफांसे ने पटवारी पर मानसिक प्रताड़ना और अतिरिक्त वसूली का आरोप लगाते हुए बताया कि उनके खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधारने के लिए पहले 6,000 से 7,000 रुपए की मांग की गई थी। उनके द्वारा 5,000 रुपए दिए जाने के बावजूद एक माह तक फाइल को दबाकर रखा गया और कोई सुधार नहीं किया गया। अंततः जब उन्होंने 500 रुपए और दिए, तब जाकर उनके नाम का संशोधन दर्ज किया गया।
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