Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा से सरकार की कमजोरी उजागर: रिपोर्ट

माले, 6 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं में तेजी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि जब भी सरकार की पकड़ कमजोर होती है, तब हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ जाती है। मंगलवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में हिंदू व्यापारी और छोटे व्यवसायी अक्सर निशाने पर रहते हैं, क्योंकि वे आर्थिक रूप से तो मजबूत हैं, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में हैं।

माले, 6 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं में तेजी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि जब भी सरकार की पकड़ कमजोर होती है, तब हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ जाती है। मंगलवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में हिंदू व्यापारी और छोटे व्यवसायी अक्सर निशाने पर रहते हैं, क्योंकि वे आर्थिक रूप से तो मजबूत हैं, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू व्यापारियों की दुकानें सार्वजनिक स्थानों पर स्थित होती हैं, जिससे वे आसानी से हमलों के शिकार बन जाते हैं। इसके अलावा, हिंदू समुदाय के पास बांग्लादेश में त्वरित जांच और न्याय सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक राजनीतिक प्रभाव भी नहीं है।

मालदीव के मीडिया आउटलेट काफू न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है, “नरसिंदी में हिंदू किराना व्यापारी मणि चक्रवर्ती की हत्या पिछले तीन सप्ताह से भी कम समय में बांग्लादेश के हिंदू समुदाय के सदस्यों पर हुआ छठा घातक हमला है। उनकी हत्या एक भीड़भाड़ वाले बाजार में हुई, लेकिन इसके बावजूद हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी। यह पैटर्न अब जाना-पहचाना बनता जा रहा है। एक ऐसा समुदाय, जो लंबे समय से राजनीतिक ध्यान के हाशिये पर रहा है, एक बार फिर राष्ट्रीय सत्ता परिवर्तन के झटके झेल रहा है, जिसने उसे सुरक्षा देने वाली संस्थाओं को अस्थिर कर दिया है।”

रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश इस समय एक असाधारण राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। शेख हसीना के सत्ता से हटने के साथ ही लंबे समय से चली आ रही केंद्रीकृत सत्ता व्यवस्था समाप्त हो गई। हालांकि उनके शासन की आलोचना उनके सत्तावादी रुझानों के लिए होती रही, लेकिन उस दौरान एक अनुशासित सुरक्षा तंत्र मौजूद था, जो सांप्रदायिक अशांति पर तेजी से प्रतिक्रिया देता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को एक ऐसे राज्य की विरासत मिली है जो एक ही राजनीतिक केंद्र के इर्द-गिर्द बना हुआ था। उस केंद्र के हटते ही पूरा तंत्र सुचारु रूप से काम करने में संघर्ष करने लगा।

रिपोर्ट में कहा गया कि सबसे बड़ी चुनौती स्पष्ट कमान श्रृंखला का अभाव है। वर्षों तक बांग्लादेश की पुलिस व्यवस्था अत्यधिक केंद्रीकृत ढांचे के तहत काम करती रही। पुलिस अधिकारी ऊपर से सीधे मिलने वाले राजनीतिक संकेतों के आदी थे। अंतरिम सरकार अभी तक कानून-व्यवस्था को दिशा देने के लिए कोई स्थिर तंत्र स्थापित नहीं कर सकी है।

इसका नतीजा यह हुआ है कि कई जिलों में पुलिस इकाइयां हिचकिचाहट के साथ काम कर रही हैं। उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि किस राजनीतिक शक्ति के पास वास्तविक अधिकार है और किन फैसलों को संस्थागत समर्थन प्राप्त है।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों की ओर इशारा करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियां केवल हिंसक अपराधों का ही संकेत नहीं देतीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा करने में राज्य की विफलता को भी उजागर करती हैं। जब 18 दिनों में छह हिंदू पुरुषों की हत्या हो जाती है, तो यह दर्शाता है कि अपराधियों को लगता है कि राज्य का ध्यान बंटा हुआ है और उन्हें सजा मिलने की संभावना बेहद कम है।

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल देख चुका है, लेकिन मौजूदा दौर को अलग बनाने वाली बात संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का एक साथ उभरना है। मणि चक्रवर्ती की हत्या कोई अकेली त्रासदी नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि राज्य उन लोगों की रक्षा करने में संघर्ष कर रहा है जो सबसे अधिक उसी पर निर्भर हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

Share:

Leave A Reviews

Related News