
भिंड जिले में 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026' में पटवारियों को निष्पादक बनाए जाने के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष विनायक तोमर के नेतृत्व में 200 से ज्यादा पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां करीब एक घंटे तक जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री के नाम एडीएम राजन बभी नाड़िया को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
पटवारी संघ ने मांग की है कि पंजीयन दस्तावेजों में पटवारी के व्यक्तिगत नाम की जगह 'मध्य प्रदेश सरकार' दर्ज किया जाए। संघ अध्यक्ष विनायक तोमर ने कहा कि ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण और नक्शा निर्माण पंचायत राज व्यवस्था के तहत हुआ है, इसलिए निष्पादन की जिम्मेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी जानी चाहिए। पंजीयन विलेख में पटवारी का नाम, पद और ई-हस्ताक्षर दर्ज होने से भविष्य में सीमा विवाद, हिस्सेदारी या कब्जे से जुड़ी त्रुटियों पर पटवारियों पर व्यक्तिगत कानूनी गाज गिर सकती है।
पटवारियों ने फार्मर आईडी बनाने को लेकर दिए जा रहे अनावश्यक दबाव और विभागीय कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की मांग की है। इसके साथ ही संघ ने 'जियो टैग गिरदावरी' को पूरी तरह अव्यवहारिक करार देते हुए इसे बंद करने की मांग उठाई। पटवारियों ने दो-टूक कहा कि जब तक जियो टैग व्यवस्था समाप्त नहीं होती, वे गिरदावरी कार्य नहीं करेंगे। इसके अलावा वेतन विसंगति, ग्रेड-पे, कैडर रिव्यू और पदोन्नति की पुरानी मांगों के निराकरण की बात भी रखी गई।
पटवारी संघ ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर विचार नहीं किया गया और प्रशासनिक दबाव बनाया गया, तो प्रदेश भर के पटवारी काम बंद कर 'कलमबंद आंदोलन' की राह पकड़ेंगे। संघ ने स्पष्ट किया कि हड़ताल की स्थिति में राजस्व कार्यों में होने वाली रुकावट की पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
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