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MP में कांग्रेस को तगड़ा झटका: विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन रद्द, रामनिवास रावत घोषित हुए नए विधायक

ग्वालियर/श्योपुर. मध्य प्रदेश की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य (रद्द) घोषित कर दिया है। जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की एकल पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत अब विजयपुर के निर्वाचित विधायक माने जाएंगे। इस फैसले ने न केवल कांग्रेस को एक सीट का नुकसान पहुँचाया है, बल्कि क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण भी पूरी तरह बदल दिए हैं।

मामले की जड़ें पिछले साल हुए विजयपुर विधानसभा उपचुनाव से जुड़ी हैं। उपचुनाव के परिणामों में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने भाजपा के दिग्गज नेता रामनिवास रावत को 7,364 वोटों के अंतर से पराजित किया था। इस हार के बाद रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने चुनावी हलफनामे (Affidavit) में आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी छिपाई थी। रावत के वकील एमपीएस रघुवंशी ने कोर्ट को बताया कि मल्होत्रा के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले लंबित थे, जिनमें से उन्होंने केवल कुछ की ही जानकारी सार्वजनिक की थी।

तथ्यों को छिपाना पड़ा भारी

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए पाया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उम्मीदवार को अपने सभी आपराधिक मामलों की सही जानकारी देना अनिवार्य है। साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अदालत ने माना कि मुकेश मल्होत्रा ने जानबूझकर तथ्यों को छिपाया, जिसके आधार पर उनका चुनाव रद्द कर दिया गया। नियम के अनुसार, यदि पहले स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार का चुनाव शून्य घोषित होता है, तो दूसरे स्थान वाले उम्मीदवार को विजयी माना जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने रामनिवास रावत को विजयपुर का नया विधायक घोषित किया है।

रामनिवास रावत की राजनीतिक वापसी

यह फैसला रामनिवास रावत के लिए एक बड़ी संजीवनी माना जा रहा है। ज्ञात हो कि 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में रावत ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान वे पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा में आने के बाद उन्हें मोहन यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था, लेकिन उपचुनाव में हार मिलने के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद रावत एक बार फिर विधायक की कुर्सी पर आसीन होंगे, जिससे सत्ताधारी दल भाजपा की स्थिति सदन में और मजबूत हुई है।

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