
सागर और बीना रेलवे स्टेशनों पर उस समय हड़कंप मच गया, जब दरभंगा-अहमदाबाद अंत्योदय एक्सप्रेस में करीब 90 से 100 नाबालिग बच्चों को बिहार से गुजरात ले जाए जाने की सूचना मिली। बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों को खबर मिली थी कि इन बच्चों को बाल मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही समिति के सदस्य सागर स्टेशन पहुंचे, लेकिन ट्रेन का स्टॉपेज कम होने के कारण वहां कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद समिति के सदस्य खुद ट्रेन में सवार हो गए ताकि बीना जंक्शन पर बच्चों को रेस्क्यू किया जा सके।
बीना रेलवे जंक्शन पर ट्रेन के पहुंचते ही आरपीएफ और जीआरपी के साथ मिलकर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। जांच के दौरान कोच में बड़ी संख्या में बच्चे मिले, लेकिन समय की कमी और रेलवे अधिकारियों के कथित असहयोग के कारण अधिकांश बच्चों को ट्रेन से नहीं उतारा जा सका। इस दौरान पुलिस केवल 3-4 बच्चों को ही सुरक्षित बाहर निकाल पाई, जबकि बाकी बच्चों को लेकर ट्रेन रवाना हो गई। समिति के सदस्यों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि पर्याप्त जानकारी देने के बावजूद बच्चों को बचाने में सफलता नहीं मिली।
कार्यवाही के दौरान पुलिस ने बिहार के मधुबनी निवासी एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया है। पूछताछ में युवक ने बताया कि वह रायसेन की एक राइस मिल में काम करता है और अपने साथियों के कहने पर उनके बच्चों को गांव से साथ ला रहा था। हालांकि, अधिकारी इस बयान की सत्यता की जांच कर रहे हैं। मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओमकार सिंह ने पुलिस और जीआरपी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रेन के जरिए अक्सर बाल श्रमिकों को ले जाया जाता है, लेकिन पुलिस के ढुलमुल रवैये के कारण तस्करों पर लगाम नहीं कस पा रही है।
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