रीवा। जिले में जबलपुर के बरगी डैम हादसे के बाद भी प्रशासनिक लापरवाही थमती नजर नहीं आ रही है। त्योंथर तहसील अंतर्गत टमस नदी के चिल्ला घाट पर बिना सुरक्षा इंतजामों के नावों का संचालन खुलेआम जारी है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि नावों में यात्रियों को बिना लाइफ जैकेट और बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के बैठाकर नदी पार कराई जा रही है।
जबलपुर के बरगी डैम में हाल ही में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद प्रदेशभर में जल परिवहन सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा नियमों के पालन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन रीवा जिले के चिल्ला घाट पर हालात अब भी बदले नहीं हैं। यहां लकड़ी की नावों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर नदी पार कराई जा रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार चिल्ला घाट क्षेत्र के कई गांवों के लोग रोजाना इसी रास्ते से नदी पार करते हैं। कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं, मजदूर और ग्रामीण सुबह से शाम तक नाव के जरिए आवागमन करते हैं। नावों में अक्सर 10 से 15 यात्रियों को एक साथ बैठाया जाता है, जबकि सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं रहती। नाव में न तो लाइफ जैकेट उपलब्ध होती हैं और न ही नाविकों द्वारा किसी प्रकार की सावधानी बरती जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बरगी डैम जैसी घटना के बाद प्रशासन को सतर्क होकर सभी घाटों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन चिल्ला घाट पर अब भी स्थिति बेहद खराब बनी हुई है।
छात्र अनूप सिंह चौहान ने बताया कि उन्हें रोज इसी तरह जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है। नाव में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सफर करते हैं, लेकिन किसी को भी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते। उन्होंने कहा कि यदि नाव पलट जाए तो लोगों की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। छात्र ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा इंतजाम लागू करने की मांग की है।
वहीं मामले को लेकर नायब तहसीलदार त्योंथर वीरेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यदि घाट पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि SDERF को सूचना देकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और नियमों के विरुद्ध नाव संचालन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ जांच और कार्रवाई की बात करने के बजाय मौके पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। लोगों ने नाव संचालन के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करने, यात्रियों की संख्या तय करने और नियमित निगरानी की मांग उठाई है। फिलहाल चिल्ला घाट पर रोजाना सैकड़ों लोग खतरे के बीच नदी पार करने को मजबूर हैं।
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