Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

जबलपुर में शिक्षा विभाग का बड़ा घोटाला: रिटायर कर्मचारियों को सालों तक बंटती रही सैलरी, 1.11 करोड़ का चूना

जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पनागर विकासखंड में शिक्षा विभाग के भीतर एक सनसनीखेज वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। विभाग में पदस्थ अकाउंटेंट विजय कुमार भलावी ने शासन की आंखों में धूल झोंककर न केवल अपने और परिवार के सदस्यों की जेबें भरीं, बल्कि उन कर्मचारियों को भी सालों तक वेतन का भुगतान किया जो सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके थे। इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद पनागर थाने में तीन पूर्व शिक्षा अधिकारियों सहित कुल 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। घोटाले की खबर लगते ही मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी है।

इस भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब भोपाल स्थित कोष लेखा विभाग ने जबलपुर कलेक्टर को पनागर ब्लॉक में भारी वित्तीय अनियमितताओं की सूचना दी। जांच में सामने आया कि साल 2018 से 2026 के बीच अतिथि शिक्षकों के नाम पर फर्जी तरीके से वेतन निकाला जा रहा था। मास्टरमाइंड अकाउंटेंट विजय कुमार भलावी ने शिक्षा अधिकारियों के लॉगिन और पासवर्ड का अनधिकृत उपयोग कर करोड़ों की राशि निकाली और उसे 16 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया। हैरानी की बात यह है कि इस सूची में कई ऐसे नाम शामिल थे जिन्होंने कभी नौकरी ही नहीं की या जो कई साल पहले रिटायर हो चुके थे।

कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच टीम ने जब बैंक खातों की पड़ताल की, तो विजय कुमार भलावी की पत्नी, दो बेटियों और रिश्तेदारों के खातों में लाखों रुपए जमा मिले। घोटाले में पूर्व शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे, त्रयंबक गणेश खरे और नरेंद्र तिवारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, क्योंकि इन्हीं के कार्यकाल के दौरान उनके डिजिटल एक्सेस का उपयोग कर फर्जी भुगतान किए गए। अब तक की जांच में 1 करोड़ 11 लाख रुपए के गबन की पुष्टि हो चुकी है, जिसे सुचित्रा पटेल, रानू भलावी, समीर कोष्ठा और अन्य सहयोगियों के खातों में भेजा गया था।

पनागर थाना पुलिस ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी सोनम कटारे के प्रतिवेदन पर आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि जिला कोषालय और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को इतने वर्षों तक इस फर्जीवाड़े की भनक क्यों नहीं लगी। फिलहाल, कलेक्टर ने बीईओ कार्यालय के सभी बैंक खातों पर रोक लगा दी है और 2016 से अब तक के सभी रिकॉर्ड तलब किए हैं। थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही इस सिंडिकेट के अन्य चेहरों का भी खुलासा हो सकता है।

Share:

Leave A Reviews

Related News