
आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच बुधवार को बड़ा फैसला सामने आया है। अमरावती को राज्य की स्थायी और एकमात्र राजधानी बनाने वाला विधेयक लोकसभा से पारित हो गया है।
यह आजाद भारत के इतिहास में पहली बार है जब संसद में किसी स्थान को राज्य की राजधानी घोषित करने के लिए विधेयक पेश कर पारित किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी, तेलुगु देशम पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस बिल का समर्थन किया, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इसका विरोध किया।
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा भी मिलना चाहिए। उन्होंने अमरावती को बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद की तर्ज पर विकसित करने की मांग रखी।
वहीं, केंद्रीय मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने सदन से अपील की कि राज्य को स्थायी राजधानी देने के लिए इस बिल को सर्वसम्मति से पारित किया जाए।
दूसरी ओर, पीवी मिधुन रेड्डी ने किसानों के हितों और मुआवजे को लेकर चिंता जताते हुए बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अमरावती के विकास के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले किसानों को अभी तक पूरा लाभ नहीं मिला है।
गौरतलब है कि 2014 के पुनर्गठन के बाद हैदराबाद को 10 वर्षों तक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की साझा राजधानी बनाया गया था। अब इस नए विधेयक के लागू होने के बाद अमरावती को कानूनी रूप से आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी का दर्जा मिल जाएगा।
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