
नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज निर्वाचन आयोग का रुख किया। पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दी गई हालिया टिप्पणी पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा नेताओं ने खरगे के बयान को न केवल अमर्यादित बताया, बल्कि इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी शुचिता का उल्लंघन करार देते हुए आयोग से तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। भाजपा का मानना है कि इस तरह की भाषा चुनावी माहौल को दूषित करती है और जनता की भावनाओं को आहत करती है।
निर्वाचन आयोग से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रतिनिधिमंडल अत्यंत दुख और आक्रोश के साथ आयोग के पास पहुंचा है। रिजिजू ने सीधा आरोप लगाया कि मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को 'आतंकवादी' कहकर न केवल एक व्यक्ति का अपमान किया है, बल्कि भारत के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के प्रधानसेवक के खिलाफ ऐसी शब्दावली का प्रयोग करना पूरे राष्ट्र का अपमान है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर कांग्रेस पार्टी की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस का एक पुराना और स्थापित 'पैटर्न' बन चुका है। सीतारमण ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह बयान चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया, जो एक चुनावी राज्य है। उन्होंने इसे जानबूझकर की गई साजिश बताते हुए कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती।
निर्मला सीतारमण ने एक भावुक पक्ष रखते हुए कहा कि आज पूरा देश पुलवामा हमले की बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील समय पर, जब देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, कांग्रेस अध्यक्ष एक चुनावी राज्य में जाकर देश के प्रधानमंत्री की तुलना आतंकवादियों से कर रहे हैं। भाजपा ने इसे कांग्रेस की संवेदनहीनता का चरम बताया। पार्टी ने आयोग से आग्रह किया है कि चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व को जवाबदेह ठहराया जाए।
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