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ब्रिटेन ने नाटो से आर्कटिक में सुरक्षा मजबूत करने का आह्वान किया

लंदन, 14 जनवरी (आईएएनएस)। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने बुधवार को नाटो से आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य और सुरक्षा मौजूदगी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण नए समुद्री मार्ग खुलने और रणनीतिक संसाधनों के उजागर होने से यह क्षेत्र अब “भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा की अग्रिम पंक्ति” बनता जा रहा है।

लंदन, 14 जनवरी (आईएएनएस)। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने बुधवार को नाटो से आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य और सुरक्षा मौजूदगी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण नए समुद्री मार्ग खुलने और रणनीतिक संसाधनों के उजागर होने से यह क्षेत्र अब “भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा की अग्रिम पंक्ति” बनता जा रहा है।

फिनलैंड और नॉर्वे की यात्रा के दौरान कूपर ने कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा “ब्रिटेन और नाटो की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण” है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने रूस को रोकने और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय रक्षा तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कूपर ने कहा, “आर्कटिक नाटो के लिए लगातार अधिक महत्वपूर्ण सीमा क्षेत्र बनता जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि ब्रिटेन और उसके सहयोगी ‘हाई नॉर्थ’ में रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि उनके हितों और समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण अवसंरचना को किसी भी खतरे से बचाया जा सके।

शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हाई नॉर्थ क्षेत्र में प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग और अंडरसी केबल जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचनाएं मौजूद हैं, जो ब्रिटिश अधिकारियों के मुताबिक अब शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के प्रति अधिक संवेदनशील होती जा रही हैं। कूपर की यात्रा में फिनलैंड के सीमा रक्षकों से मुलाकात और उत्तरी नॉर्वे के कैंप वाइकिंग का दौरा भी शामिल है, जहां ब्रिटिश रॉयल मरीन्स अत्यधिक ठंडे मौसम में सैन्य अभ्यास कर रहे हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि ब्रिटेन लंबे समय से जॉइंट एक्सपीडिशनरी फोर्स (जेईएफ) का प्रमुख नेतृत्वकर्ता रहा है। यह उत्तरी यूरोप के 10 देशों का गठबंधन है, जो हाई नॉर्थ की सुरक्षा पर केंद्रित है। हाल ही में इस बल ने अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास ‘टारासिस’ किया, जिसमें बाल्टिक क्षेत्र और उत्तरी अटलांटिक में हजारों सैनिकों, दर्जनों जहाजों, वाहनों और विमानों की तैनाती की गई।

इधर, फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो ने बुधवार को कहा कि फ्रांस 6 फरवरी को ग्रीनलैंड में अपना वाणिज्य दूतावास खोलेगा। इसे अमेरिका द्वारा द्वीप पर कब्जे की बार-बार दी जा रही धमकियों के बीच ग्रीनलैंड के समर्थन में उठाया गया ठोस कदम बताया गया है।

फ्रांसीसी रेडियो आरटीएल को दिए साक्षात्कार में बैरो ने कहा कि ग्रीनलैंड न तो अमेरिका के स्वामित्व में जाना चाहता है, न ही उसके शासन या एकीकरण का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि द्वीप ने डेनमार्क, नाटो और यूरोपीय संघ के ढांचे में बने रहने का विकल्प चुना है।

उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के बाद आई है, जिनमें उन्होंने ग्रीनलैंड को हासिल करने में रुचि जताई थी और सैन्य हस्तक्षेप की संभावना का संकेत दिया था।

--आईएएनएस

डीएससी

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