
कनाडा सरकार ने अपनी नागरिकता नीति में एक ऐतिहासिक संशोधन करते हुए पात्रता के दायरे को काफी बढ़ा दिया है। 15 दिसंबर से प्रभावी हुए नए नियमों के तहत अब उन व्यक्तियों को भी कनाडाई नागरिकता मिल सकेगी, जिनके दादा-दादी या परदादा-परदादी का जन्म कनाडा में हुआ था। इससे पहले, यह अधिकार केवल एक पीढ़ी तक ही सीमित था, लेकिन अब पारिवारिक इतिहास के आधार पर अगली पीढ़ियों के लिए भी रास्ते खुल गए हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर अमेरिका में रह रहे उन लोगों पर पड़ रहा है, जिनके पूर्वज कभी कनाडा के निवासी थे।
नियमों में ढील मिलते ही कनाडाई इमिग्रेशन सिस्टम पर आवेदनों का भारी दबाव देखा जा रहा है। निकोलस बर्नियर और अमनदीप हीर जैसे इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि वकीलों और सलाहकारों के पास परामर्श के लिए आने वालों की संख्या में अचानक बाढ़ आ गई है। कई अमेरिकी नागरिक बेहतर भविष्य, सुरक्षा और राजनीतिक कारणों से कनाडा की नागरिकता में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आवेदनों की इस भारी संख्या के कारण शरणार्थियों और अन्य अस्थायी वीजा की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
नए नियमों के अनुसार, 15 दिसंबर से पहले जन्मे लोग पूर्वजों का प्रमाण देकर नागरिकता का दावा कर सकते हैं। हालांकि, इस तारीख के बाद जन्म लेने वालों के लिए नियम कड़े हैं; उन्हें यह साबित करना होगा कि उनके माता-पिता ने कम से कम 1,095 दिन कनाडा में बिताए हैं। आवेदन के लिए 'सिटीजनशिप सर्टिफिकेट' अनिवार्य है, जिसकी सरकारी फीस लगभग 75 कनाडाई डॉलर है। वर्तमान में लगभग 56,000 आवेदन लंबित हैं और एक आवेदन को पूरा होने में करीब 10 महीने का समय लग सकता है।
इस नए कानून ने जहां हजारों लोगों के लिए उम्मीदें जगाई हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों ने इस पर बहस भी शुरू कर दी है। फेन हैम्पसन जैसे विशेषज्ञों का तर्क है कि उन लोगों को नागरिकता देना जिनका वर्तमान कनाडा से बहुत कम जुड़ाव है, प्रशासनिक और सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि कनाडा का इमिग्रेशन विभाग इस बढ़ते प्रशासनिक बोझ और लंबी प्रतीक्षा सूची से कैसे निपटता है।
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