
वॉशिंगटन/मॉस्को. मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने दुनिया को दो गुटों में बांट दिया है। इस युद्ध के कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में तेल की सप्लाई रुकने से ग्लोबल इकोनॉमी चरमरा रही है। लेकिन इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सबको चौंका दिया है। खबर है कि कट्टर दुश्मन माने जाने वाले रूस और अमेरिका एक बार फिर मेज पर आमने-सामने बैठ सकते हैं।
अमेरिका इस साल दिसंबर में मियामी में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ताजा संकेतों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को औपचारिक निमंत्रण भेजा है और क्रेमलिन (रूस) इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यदि व्लादिमीर पुतिन मियामी जाते हैं, तो यह 2019 के बाद पहला मौका होगा जब वह G20 शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "पुतिन की अमेरिका यात्रा पर विचार किया जा रहा है, हालांकि अंतिम फैसला सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों को देखकर लिया जाएगा।"
ईरान संकट के बीच ट्रंप का रुख रूस के प्रति नरम दिखाई दे रहा है। ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि रूस को G8 (अब G7) से बाहर करना एक ऐतिहासिक गलती थी। उनका मानना है कि बिना रूस के वैश्विक समस्याओं, खासकर ईरान और यूक्रेन संकट का समाधान नहीं निकाला जा सकता। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए।
ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही ठप होने के कगार पर है। चूंकि रूस के ईरान के साथ बेहद करीबी सैन्य और रणनीतिक संबंध हैं, इसलिए ट्रंप प्रशासन चाहता है कि पुतिन के जरिए ईरान पर दबाव बनाया जाए ताकि ग्लोबल ऑइल सप्लाई को बहाल किया जा सके।
पुतिन की यात्रा इतनी आसान नहीं होगी। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन और पश्चिमी देशों के बीच गहरी खाई है। लेकिन मियामी में होने वाली यह संभावित मुलाकात विश्व युद्ध की आहट के बीच शांति की नई उम्मीद बन सकती है।
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