नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी इंदौर आए और अपने साथ एक माइक और 'सिस्टम बनाम छात्र' का बना-बनाया नैरेटिव लेकर आए।
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नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी इंदौर आए और अपने साथ एक माइक और 'सिस्टम बनाम छात्र' का बना-बनाया नैरेटिव लेकर आए।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों की हर चुनौती को 'कब्जे में लिए गए सिस्टम' के सबूत के तौर पर पेश किया और शिक्षा के जटिल इकोसिस्टम को सिर्फ राजनीतिक नारों तक सीमित कर दिया। लेकिन हकीकत सिर्फ बातों से कहीं ज्यादा अहम है। छात्र जवाब के हकदार हैं, न कि राजनीतिक ड्रामे के।
उन्होंने कहा कि जबकि विपक्ष के नेता अपना एजेंडा फैलाने में व्यस्त हैं, भारत ने उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाई है। 2014-15 में जीईआर (सकल नामांकन अनुपात) 23.7 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है। पीएम-विद्यालक्ष्मी अब योग्य छात्रों को बिना गारंटी (कोलेटरल-फ्री) के शिक्षा ऋण और ब्याज पर मदद देती है, जबकि पीएम-यूएसएचए राज्य के संस्थानों में बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता को मजबूत कर रही है। पिछले दशक में हमारी क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है और हमारी संस्थागत क्षमता भी बढ़ी है।
भाजपा नेता ने कहा कि परीक्षा सुधारों के मामले में, सरकार कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग की ओर बढ़ी है ताकि पेपर-आधारित परीक्षाओं से जुड़ी कमियों को कम किया जा सके, साथ ही यह भी माना है कि परीक्षा की शुचिता को लगातार मजबूत करने की जरूरत है। मोदी सरकार ने 2024 में परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ एक खास कानून बनाया और अब इसे और सख्त सजा और फास्ट-ट्रैक अदालतों के साथ मजबूत किया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जो लोग छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, उन्हें कड़ी सजा मिले।
उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन अवसर, किफायती शिक्षा, बुनियादी ढांचे और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए किए जा रहे कामों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए। क्या राहुल गांधी समाधानों के बारे में बात करेंगे, या वह हर छात्र की चिंता को राजनीतिक हथियार बनाते रहेंगे?
उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों को यह बताने के लिए किसी राजनेता की जरूरत नहीं है कि उन्हें गुस्सा होना चाहिए। उन्हें ऐसे संस्थानों की जरूरत है जो काम करें, ऐसे अवसरों की जो बढ़ें और ऐसी सरकार की जो उनके साथ खड़ी हो। छात्रों पर राजनीति करने और छात्रों के लिए राजनीति करने के बीच यही फर्क है।
--आईएएनएस
एमएस/
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