
छतरपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ सागर लोकायुक्त टीम ने गुरुवार को एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने कलेक्ट्रेट परिसर में घेराबंदी कर पटवारी राहुल अग्रवाल को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी पटवारी केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित होने वाली एक गरीब महिला से उसकी मुआवजा राशि स्वीकृत कराने के नाम पर पैसों की मांग कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट कार्यालय में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, किशनगढ़ क्षेत्र के नेगुवां गांव की निवासी 43 वर्षीय शगुंती बाई सौर की जमीन केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई है। इसके विस्थापन के बदले महिला को लगभग 12.50 लाख रुपये की मुआवजा राशि मिलनी थी। आरोप है कि हल्का पटवारी राहुल अग्रवाल ने इस राशि को जारी कराने और फाइल आगे बढ़ाने के एवज में कुल 1.50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। पीड़ित महिला ने बताया कि पटवारी उसे धमकी दे रहा था कि यदि पैसे नहीं दिए, तो मुआवजा राशि सरकारी खजाने में वापस करवा दी जाएगी।
आरोपी पटवारी के दबाव से परेशान होकर शगुंती बाई ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की पुष्टि होने के बाद, निरीक्षक रोशनी जैन के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। गुरुवार को जैसे ही महिला ने कलेक्ट्रेट परिसर में पटवारी को रिश्वत की अगली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये दिए, पहले से तैयार लोकायुक्त टीम ने उसे दबोच लिया। जाँच के दौरान पटवारी के हाथ धुलवाए गए, जो केमिकल के संपर्क में आते ही गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी पटवारी राहुल अग्रवाल ने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे एक साजिश करार दिया। उसने दावा किया कि उसे फंसाया गया है और उसने सीसीटीवी कैमरों की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त साक्ष्य और रिकॉर्डिंग मौजूद है, जो आरोपी के दबाव और मांग की पुष्टि करते हैं। फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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