
छिंदवाड़ा जिले में जिला प्रशासन और कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद नरवाई जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला मंगलवार रात खजरी रोड स्थित दूध डेयरी जामुनझिरी मार्ग का है, जहाँ किसानों द्वारा खेत में लगाई गई आग ने बुधवार तक विकराल रूप धारण कर लिया। शुष्क मौसम और हवाओं के चलते यह आग लगभग 10 एकड़ के बड़े रकबे में फैल गई, जिससे आसमान में धुएं का गुबार छा गया और आसपास के वातावरण में भारी तपिश महसूस की गई।
प्रशासनिक सख्ती पर भारी पड़ती मनमानी हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को नरवाई न जलाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों द्वारा मिट्टी की उर्वरता घटने और पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में आगाह किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बीते एक सप्ताह के भीतर जिले में आधा दर्जन से अधिक ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। प्रशासन ने अब तक 60 से अधिक किसानों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की है, लेकिन इसके बावजूद मुख्यालय से सटे इलाकों में ही सरकारी आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
खतरे की जद में रिहायशी इलाके और बिजली लाइनें जामुनझिरी मार्ग पर लगी यह आग स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का बड़ा सबब बन गई है। आग का केंद्र डेयरी फार्म और रिहायशी बस्तियों के बेहद करीब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे सड़क किनारे लगे पेड़ों और ऊपर से गुजर रही बिजली की हाई-टेंशन लाइनों को भी खतरा पैदा हो गया है। यदि समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया, तो यह किसी बड़ी जनहानि या अग्निकांड का कारण बन सकती है।
निगरानी तंत्र पर उठते सवाल ग्रामीणों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई और नोटिस जारी करने तक सीमित है। मौके पर निगरानी और गश्ती दल की कमी के कारण किसान रात के अंधेरे में खेतों में आग लगा देते हैं। लोगों ने मांग की है कि केवल एफआईआर दर्ज करना काफी नहीं है, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त निगरानी रखी जाए और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए ताकि अन्य किसानों के बीच कड़ा संदेश जा सके।
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